भारत

रेलवे के 7 भीड़भाड़ वाले रूट होंगे फोरलेन, मोदी कैबिनेट की बड़ी मंजूरी; बिहार-झारखंड वालों की बल्ले-बल्ले

नई दिल्ली
केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में रेलवे के 7 सबसे व्यस्त (हाई डेंसिटी) रूट्स को फोर लेन ट्रैक करने की मंजूरी दे दी गई. अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की सूचना देते हुए इसका ऐलान किया. हालांकि, इससे करीब 2 हफ्ते पहले 26 अगस्त को वह इन रूट्स को फोर लेने किए जाने की जानकारी दे चुके थे.इन परियोजनाओं के तहत करीब 656 किमी नई रेल लाइनें जोड़ी या अपग्रेड की जाएंगी. इसके लिए कुल 10,783 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इससे रेलवे के मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के संचालन में सुधार होगा। 

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इन परियोजनाओं का फायदा पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को मिलेगा. करीब 4,790 गांव इन परियोजनाओं से बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जुड़ेंगे. इन गांवों में लगभग 56 लाख लोगों की आबादी रहती है. नई लाइनें बनने से यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों की आवाजाही भी आसान होगी। 

11,000 किलोमीटर लंबा ट्रैक होगा 4-लेन
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगर हम सबसे अहम रेलवे कॉरिडोर पर नजर डालें तो यह 11,000 किलोमीटर लंबे, 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर हैं. इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को 4-लेन का बनाया जा रहा है और कई दूसरे कॉरिडोर पर भी काम चल रहा है. ये आने वाले समय में बहुत ज्‍यादा ट्रैफिक संभालेंगे। 

ये रूट संभालते हैं 40% भीड़ का हिस्‍सा
दिल्ली से मुंबई, मुंबई से चेन्नई, चेन्नई से कोलकाता और कोलकाता से मुंबई – यह 'गोल्डन क्वाड्रिलैटरल' है. ये 7 कॉरिडोर रेलवे के कुल ट्रैफिक का लगभग 40% हिस्सा संभालते हैं. इन कॉरिडोर में से लगभग 2,000 किलोमीटर पहले ही 4-लेन का हो चुका है. लगभग 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है और बाकी 4,000 किलोमीटर के लिए अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। 

3-मल्‍टी ट्रैकिंग प्रोजेक्‍ट को भी मंजूरी 
4 लेन प्रोजेकट के अलावा, कैबिनेट ने 5 राज्यों के 14 ज़िलों में फैले 3 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है. इस प्रोजेकट से भारतीय रेलवे में लगभग 656 km नेटवर्क फैलेगा. इन प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत ₹10,783 करोड़ है और इन्हें 2029–30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

5 नए प्रोजेक्‍ट की भी मंजूरी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा‍ कि केंद्रीय कैबिनेट ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों के 17 जिलों में 5 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है. इन प्रोजेक्ट्स से भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 540 किलोमीटर बढ़ जाएगा. इन प्रोजेक्ट्स की कुल अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है। 

कौन-कौन सी रेल लाइनें होंगी अपग्रेड
सरकार ने खड़गपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन में बागडेही तक 4th लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड 4th लाइन और बिलासपुर यानी उसलापुर-पेंड्रा रोड 3rd लाइन को मंजूरी दी है. इन लाइनों के मल्टीट्रैकिंग से मौजूदा रेल रूट पर ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार होगी। 

रेलवे का ट्रैफिक जाम होगा कम
नई रेल लाइनों के जुड़ने से मौजूदा रूट पर ट्रेनों का कंजेशन कम करने में मदद मिलेगी. ट्रेनों का संचालन ज्यादा सुचारू होगा और यात्री तथा मालगाड़ियों को अलग-अलग समय और रूट पर चलाने की सुविधा बढ़ेगी. इससे माल ढुलाई की क्षमता भी मजबूत होगी। 

पर्यटन और धार्मिक स्थलों को फायदा
इन परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इनमें पुरी का जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक, अचानकमार टाइगर रिजर्व, तारातारिणी मंदिर और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं. बेहतर रेल कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 

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