मध्यप्रदेश

मप्र पुलिस का मानवीय चेहरा: आरक्षकों ने सीपीआर देकर बचाई आगंतुक की जान

मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशीलता और दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण
आरक्षकों ने सीपीआर देकर बचाई आगंतुक की जान
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने आरक्षकों को पुरस्कृत करने की घोषणा की
समय पर दिए गए सीपीआर से अचेत आगंतुक को मिला नया जीवन

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भोपाल
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिसकर्मियों को नियमित रूप से प्रदान किए जाने वाले सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण का सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहे है। इसी के परिणामस्‍वरूप आज पुलिस आयुक्त कार्यालय, भोपाल में पदस्थ दो आरक्षकों ने त्वरित सूझबूझ, तत्परता एवं सीपीआर कौशल से एक अचेत नागरिक को समय रहते जीवनरक्षक सहायता प्रदान कर उसकी जान बचाई। इस सराहनीय कार्य के लिए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने दोनों पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यालय पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल में एक आगंतुक अचानक अस्वस्थ होकर अचेत अवस्था में जमीन पर गिर पड़ा। घटना को देखते हुए वहां मौजूद चालक आरक्षक क्रमांक 858 मुकेश साहू एवं गनमैन आरक्षक क्रमांक 3685 रंजीत रघुवंशी ने तत्काल स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना समय गंवाए प्राथमिक उपचार प्रारंभ किया।
दोनों आरक्षकों ने प्रशिक्षित दक्षता का परिचय देते हुए अचेत व्यक्ति को तत्काल सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया। उन्होंने बारी-बारी से लगातार सीपीआर प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप कुछ ही समय में आगंतुक को होश आ गया। प्राथमिक उपचार के उपरांत उसे बेहतर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल भेजा गया।

उल्‍लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा समय-समय पर पुलिसकर्मियों को सीपीआर एवं अन्य आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि दुर्घटना, हृदयाघात अथवा अन्य आपात स्थितियों में नागरिकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। आज की यह घटना ऐसे प्रशिक्षणों की उपयोगिता और प्रभावशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा एवं सेवा के अपने संकल्प के अनुरूप कानून-व्यवस्था के साथ-साथ आपात परिस्थितियों में मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रतिबद्ध है।
 

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