मध्यप्रदेश

इंदौर में ‘वन नेशन-वन स्टाइपेंड’ पर आर-पार, MY अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से सेवाएं प्रभावित

इंदौर

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इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच में चिकित्सा व्यवस्था उस समय प्रभावित हुई जब जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। यहां के डॉक्टर भोपाल में हुए लाठीचार्ज और 'वन नेशन-वन स्टाइपेंड' की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर्स 3 दिन से सड़कों पर हैं। भोपाल में सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां डॉक्टर सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में इसका असर दिख रहा है और कई जगह ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं।

हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की
अस्पताल परिसर में एकत्र हुए रेजिडेंट डॉक्टरों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों का कहना है कि एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र अस्पतालों में दिन-रात सेवाएं देते हैं। इसके बावजूद देश के अलग-अलग राज्यों में उनके मानदेय में भारी असमानता है। डॉक्टरों की मांग है कि पूरे देश में एक समान मानदेय व्यवस्था लागू की जाए और भोपाल में चिकित्सकों पर बल प्रयोग करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो। इंटर्न डॉक्टर राजेश सोनी ने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होगी, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। डॉ. रागिनी खन्ना ने बताया कि धूप और गर्मी में भी हम लगातार आंदोलन करेंगे। सीनियर डॉक्टर, हमारे सभी साथी और परिचित इस आंदोलन में हमारे साथ हैं। 

स्टाइपेंड पर पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था की मांग
जूडा इंदौर के अध्यक्ष डॉक्टर विक्रम नेतू ने कहा कि भोपाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर लाठीचार्ज किया गया। हम दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं। इस तरह का सलूक कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमारी प्रमुख मांग है कि पूरे देश में समान स्टाइपेंड व्यवस्था लागू होना चाहिए।  

अस्पताल प्रबंधन बोला मरीज परेशान नहीं होंगे
अस्पताल प्रबंधक डॉक्टर अशोक यादव का कहना है कि मरीजों की देखभाल प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। प्रबंधन के अनुसार ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से चालू हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों और कंसल्टेंट्स को मोर्चे पर तैनात किया गया है। वहीं कई रेजिडेंट डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है ताकि मरीजों की जान जोखिम में न पड़े। 

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