राजस्थान

राजस्थान में विशेष शिक्षा शिक्षकों को राहत, अब नहीं दिया जाएगा गैर-शैक्षणिक काम

जयपुर
 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए श्रीगंगानगर और अलवर से राहत की खबर सामने आई है। दोनों जिलों के शिक्षा विभागों ने निर्देश जारी कर विशेष शिक्षा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां नहीं देने को कहा है। यानी अब इन शिक्षकों को कार्यक्रमों और परीक्षाओं के प्रबंधन जैसे ऐसे कामों में नहीं लगाया जाएगा, जो उनकी मुख्य जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं हैं।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

75 हजार से ज्यादा बच्चों की जिम्मेदारी
यह निर्देश ऐसे समय आया है जब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 75 हजार से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की शिक्षा और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में विशेष शिक्षा शिक्षकों की महत्लपूर्ण भूमिका है। ऐसे में विभाग का मानना है कि शिक्षकों का समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के बजाय उन्हें CWSN बच्चों से जुड़े कामों पर ध्यान देना चाहिए।

शिक्षकों को किन कामों पर देना होगा ध्यान?
आदेश में बताया गया है कि सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए जिला स्तर पर विशेष शिक्षा शिक्षक और रिसोर्स पर्सन नियुक्त किए हैं। इन शिक्षकों को CWSN बच्चों को पढ़ाने और उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से विशेष दक्षताएं देने की ट्रेनिंग मिली हुई है।

इन शिक्षकों का काम सिर्फ अपने स्कूल के CWSN बच्चों को पढ़ाना नहीं है। उन्हें अपने स्कूल के अलावा आसपास के प्राथमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों और शहरी क्लस्टर प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के क्षेत्र में आने वाले CWSN बच्चों को भी पढ़ाई में मदद देनी होती है।

इसके साथ ही इन शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से जुड़ी कई गतिविधियां भी संभालनी होती हैं। इनमें CWSN बच्चों के लिए परिवहन, एस्कॉर्ट, रीडर और छात्रवृत्ति भत्ते से जुड़ी सुविधाओं का काम शामिल है। इसके अलावा ऐसे बच्चों की पहचान करना भी इन शिक्षकों की जिम्मेदारी है, जिन्हें विशेष शिक्षा और सहायता की जरूरत है।

संस्थान प्रधानों को दिए निर्देश
विभाग ने सभी संस्थान प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार न दिया जाए। उनसे गैर-शैक्षणिक काम कराने के बजाय उन्हें विशेष जरूरत वाले बच्चों की पढ़ाई, मदद और ऐसे बच्चों की पहचान से जुड़े कामों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।

राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने भी कहा कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इन शिक्षकों का काम सिर्फ बच्चों को पढ़ाना ही नहीं है। वे स्कूल में विशेष जरूरत वाले बच्चों के व्यवहार को संभालने और उन्हें सहज महसूस कराने में भी मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के बाद ब्लॉक स्तर पर तैनात विशेष शिक्षक ऐसे दूसरे बच्चों की पहचान करने और उन्हें सही स्कूलिंग से जोड़ने का काम भी करते हैं। इसलिए इन शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

पहले भी हो चुकी है भर्ती और पदोन्नति
पिछले साल नवंबर में राज्य सरकार ने 242 विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति के लिए वित्तीय मंजूरी दी थी। इसके बाद कक्षा 11वीं और 12वीं के विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष शिक्षक मिलने का रास्ता साफ हुआ।

राज्य में पहली बार विशेष शिक्षा शिक्षकों को व्याख्याता के पद पर भर्ती और पदोन्नत किया गया। इससे पहले साल 2007 में ग्रेड-III शिक्षक के पद पर विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसके बाद 2015 में कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती की गई थी।

 

 

Related Articles

Back to top button