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वंदे मातरम के 150 साल: देशभर में कार्यक्रम, PM मोदी भी करेंगे शामिल; उठे धार्मिक सवाल

 नई दिल्ली

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भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर केंद्र सरकार ने देश भर के 150 स्थानों पर आयोजन का फैसला लिया है। इसके तहत सामूहिक रूप से वंदे मातरम गाया जाएगा। यही नहीं सभी आयोजनों में मुख्य अतिथि के तौर पर कोई वरिष्ठ नेता, मंत्री या अधिकारी भी शामिल होगा। खुद पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ऐसे ही एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे। इस बीच जम्मू-कश्मीर में इन आयोजनों को लेकर इस्लाम वाला सवाल उठ गया है।

मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा ने केंद्र शासित प्रदेश की सरकार पर सवाल उठाए हैं। सरकार ने सभी स्कूलों को यह आदेश दिए जाने पर आपत्ति जताई है कि वे वंदे मातरम पर संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम करें। इस्लामिक संस्था का कहना है कि वंदे मातरम के आयोजन में शामिल होने के लिए कहना गैर-इस्लामी है। यह मुस्लिम बहुल इलाके पर आरएसएस की हिंदुत्व वाली विचारधारा को थोपने का प्रयास है। बता दें कि 7 नवंबर को होने वाले आयोजनों में स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों, अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों सहित नागरिकों की भागीदारी रहेगी। इन आयोजनों में वंदे मातरम का सामूहिक गान होगा।

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में होने वाले उद्घाटन समारोह में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम, वंदे मातरम के 150 वर्षों के इतिहास पर एक प्रदर्शनी, एक लघु वृत्तचित्र फिल्म का प्रदर्शन और एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया जाएगा। भाजपा भी इस उपलब्धि को एक उत्सव के रूप में मनाने की योजना बना रही है। नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में भाजपा के महासचिव तरुण चुघ ने कहा, 'इस अवसर को मनाने के लिए सात नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ’
इन प्रमुख स्थानों पर भी होगा वंदे मातरम का गायन

उन्होंने बताया कि सात नवंबर को 150 महत्वपूर्ण स्थानों पर वंदे मातरम गाया जाएगा, जिसके बाद स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की शपथ ली जाएगी। इस दौरान कविता लेखन, पाठन और चित्रकला जैसे कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जिन स्थानों पर सात नवंबर को वंदे मातरम का गायन आयोजित किया जाएगा उनमें कारगिल युद्ध स्मारक, अंडमान और निकोबार सेलुलर जेल, ओडिशा का स्वराज आश्रम, आगरा में शहीद स्मारक पार्क और वाराणसी में नमो घाट शामिल हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि वंदे मातरम अंग्रेजों से भारत की मुक्ति के लिए एक प्रमुख मंत्र के रूप में उभरा।

क्या है इस्लाम वाली दलील और जम्मू-कश्मीर से सरकार से क्या अपील

संस्कृति मंत्रालय के अनुसार ऐसा माना जाता है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत की रचना सात नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के अवसर पर की थी। मातृभूमि की वंदना में गाए गए इस गीत को 1950 में राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था। वहीं मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा ने एक लेटर लिखकर जम्मू-कश्मीर की सरकार और एलजी से मांग की है कि वंदे मातरम के आयोजन में भाग लेने की अनिवार्यता खत्म की जाए। ऐसा करना गैर-इस्लामिक है और हिंदुत्व की विचारधारा को थोपने वाला है।

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