मध्यप्रदेश

उज्जैन में स्थित श्री महाकाल मंदिर में शिवनवरात्रि की तैयारियां जोरों पर, बदलेगा पूजा का समय

उज्जैन
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित श्री महाकाल मंदिर में शिवनवरात्रि की तैयारियां जोरों पर है। शिव नवरात्रि महोत्सव के दिन विशेष पूजा और भस्म आरती का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भगवान महाकाल के सिर पर विशेष मुकुट भी पहनाया जाएगा। मंदिर परिसर में विशेष सफाई और रंग-रोगन का काम चल रहा है। कोटितीर्थ कुंड और रुद्रयंत्र की भी सफाई की जाएगी।

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महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि का पर्व 17 फरवरी से शुरू होगा। नव दिवसीय यह पर्व महाकाल के आंगन में मनाया जाता है। इस दौरान बाबा महाकाल अपने भक्तों को अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देते हैं। परंपरा के मुताबिक, 17 फरवरी को सुबह नैवेद्य कक्ष में भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन करने के बाद कोटितीर्थ कुंड के समीप श्री कोटेश्वर और रामेश्वर महादेव मंदिर में शिव पंचमी की पूजा के साथ शिवनवरात्रि की शुरुआत होगी। इस दौरान भगवान महाकाल का नौ दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किया जाएगा।
 
महाकाल मंदिर में 17 फरवरी से शुरू हो रहे शिव नवरात्रि महोत्सव के दौरान पूजा का समय बदल दिया गया है। भोग आरती का समय सुबह 10:30 बजे से बदलकर दोपहर 1 बजे कर दिया गया है। संध्या पूजा भी शाम 5 बजे की जगह दोपहर 3 बजे से होगी। भोग आरती का समय अब दोपहर 1 बजे और संध्या आरती दोपहर 3 बजे निर्धारित किया गया है, जो नौ दिनों तक ऐसा ही रहेगा।

महाशिवरात्रि के दिन रातभर भगवान महाकाल की पूजा महानिशा काल में विभिन्न प्रकार से होगी। 27 फरवरी को सुबह 4 बजे भगवान महाकाल को सप्तधान मुखारविंद पहनाकर उनके सिर पर सवा मन फल और फूलों से बना मुकुट रखा जाएगा। इसके बाद सुबह 11 बजे से सेहरा उतारने के बाद वर्ष में एक बार दोपहर में भस्म आरती होगी। भस्म आरती के बाद भगवान को भोग लगाया जाएगा।
 
9 दिन इन स्वरूपों में होगा श्रृंगार
    17 फरवरी को वस्त्रधारण श्रृंगार
    18 फरवरी को दिव्य चंदन/वस्त्रधारण श्रृंगार
    19 फरवरी को शेषनाग श्रृंगार
    20 फरवरी को घटाघोप श्रृंगार
    21 फरवरी को छबीना श्रृंगार
    22 फरवरी को होलकर श्रृंगार
    23 फरवरी को मनमहेश श्रृंगार
    24 फरवरी को उमामहेश श्रृंगार
    25 फरवरी को शिव तांडव श्रृंगार
    26 फरवरी को महाशिवरात्रि महापर्व
    27 फरवरी को सप्तधान/सेहरा श्रृंगार

 

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