मध्यप्रदेश

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य होगा : मनु श्रीवास्तव

भोपाल
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत आगामी वर्ष-2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष हरित हाइड्रोजन के उत्पादन का लक्ष्य सुनिश्चित किया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में निवेशकों के साथ राउंड टेबल चर्चा के दौरान अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव ने कहा कि ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में होगा। उन्होंने निवेशकों के साथ राउंड टेबल के दौरान राज्य शासन द्वारा उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं जैसे भूमि, प्रदेश में पर्याप्त बिजली, अनुकूल एवं भौगोलिक संरचना से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य में प्रचुर नवकरणीय ऊर्जा संसाधन, सहायक नीतिगत ढाँचा हरित हाइड्रोजन परियोजना के लिये अनुकूल माहौल तैयार करता है। चर्चा के दौरान निवेशकों द्वारा पूछे गये सवालों एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

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ऊर्जा के वैकल्पिक माध्यमों में से ग्रीन हाइड्रोजन के अलावा अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश शासन की अक्षय ऊर्जा नीति 2022 का उद्देश्य अक्षय ऊर्जा उपकरण निर्माण के लिए अनुकूल पारिस्थितिकीय क्षेत्र बनकर और अक्षय ऊर्जा को बड़े पैमाने पर अपनाने की सुविधा प्रदान करके राज्य को अक्षय ऊर्जा केन्द्र के रूप में स्थापित करना है। इसमें भूमि अधिग्रहण लागत पर 50 प्रतिशत छूट और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए नामित निजी भूमि खरीदी पर स्टॉम्प शुल्क पर 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति राशि प्रोत्साहन स्वरूप शासन द्वारा प्रदान की जाती है।

अपर मुख्य सचिव श्री श्रीवास्तव ने बताया कि सीईओ गोलमेज सम्मेलन में प्राप्त सिफारिशें एवं सुझाव मध्यप्रदेश की भविष्य की ऊर्जा नीति एवं रणनीतियों को बनाने में नया स्वरूप प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी। राज्य की हरित हाइड्रोजन क्षमता को साकार करने और भारत के सतत ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान देने में उद्योगपतियों, अधिकारियों एवं वित्तीय हितधारकों का सहयोग आवश्यक है। ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री अमनवीर सिंह बैंस ने कहा कि मध्यप्रदेश हरित ऊर्जा निवेश के लिये तेजी से एक अनुकूल राज्य के रूप में उभर रहा है। पिछले 10 वर्षों में राज्य की अक्षय ऊर्जा क्षमता में 11 गुना वृद्धि हुई है, जो इसकी कुल स्थापित बिजली क्षमता का कुल 24 प्रतिशत है।

 

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