मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में 12 साल बाद होंगे कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव, कार्यक्रम भी हुआ तैयार

भोपाल
राज्य सरकार 12 साल बाद मई में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के चुनाव करवाने जा रही है। कार्यक्रम भी तैयार कर लिया गया है। चुनाव सितंबर तक संपन्न करवा लिए जाएंगे। इस संबंध में सभी जिला प्रशासन एवं सहकारिता विभाग के मैदानी अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है।

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प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में चुनाव वर्ष 2013 के बाद से नहीं हुए हैं। इसके बाद वर्ष 2018 में चुनाव होना था, लेकिन वह प्रदेश में विधानसभा चुनाव, फिर लोकसभा चुनाव, फिर विधानसभा की 30 से अधिक सीटों के लिए उपचुनाव, फिर विधानसभा और लोकसभा चुनाव के कारण टालने पड़े। समिति में अध्यक्ष और सदस्यों के चुनाव किसानों के जरिये किए जाते हैं। बता दें कि पैक्स और अपेक्स के चुनाव को लेकर विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा था, जिसके बाद अब सरकार ने चुनाव कराने का निर्णय लिया है।

जल्द होंगे प्रदेश में पैक्स और अपैक्स के चुनाव
सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने विधानसभा में दावा किया था कि जल्द ही प्रदेश में पैक्स और अपैक्स के चुनाव कराएं जाएंगे। पैक्स के चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। 14 मई को सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। सितंबर तक समिति और बैंकों में संचालक मंडल का गठन कर लिया जाएगा।

प्रशासकों के भरोसे समितियां
बता दें, वर्तमान में ये समितियां प्रशासकों के भरोसे चल रही हैं। प्रदेश के 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में से केवल एक जिला केंद्रीय सहकारी बैंक पन्ना में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार कोर्ट कमिश्नर नियुक्त है। शेष 37 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में प्रशासक नियुक्त हैं। निर्वाचन नहीं होने के कारण यह स्थिति है।
मध्य प्रदेश में कार्यरत 4,539 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां (पैक्स) में से 50 प्रतिशत घाटे में चल रही हैं। वर्ष 2022-23 में 2886 समितियां और वर्ष 2023-24 में 1890 समितियां घाटे में रहीं। इन समितियों के चुनाव वर्षों से नहीं हुए हैं।  रिणामस्वरूप अब इनमें से आधी से अधिक समितियों को घाटा हुआ है। सहकारी समितियों को घाटे से उबारने के लिए दूध, पेट्रोल पंप, मत्स्य पालन, एलपीजी वितरण केंद्र से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास किए जाएंगे। 5,296 सहकारी केंद्रों के माध्यम से किसानों को खाद का आपूर्ति कराई जा रही है। सहकारी बैंकों को हानि से उबारने के लिए वित्तीय मदद भी की जा रही है। हालांकि वर्तमान में नौ सहकारी बैंक हानि में है। सरकार का दावा है कि इसमें से चार बैंकों को हानि से उबार लिया जाएगा।

 

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