राजनीति

प्रशांत किशोर ने अपनी जन सुराज पार्टी की पहली रैली में जितने तीर छोड़े, सारे के सारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए थे

पटना
एक समय जनता दल यूनाइटेड में नंबर 2 का दर्जा हासिल कर चुके प्रशांत किशोर ने अपनी जन सुराज पार्टी की पहली रैली में जितने तीर छोड़े, सारे के सारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए थे। आश्चचर्यजनक रूप से उन्होंने तेजस्वी यादव को लेकर नौवीं फेल वाला पन्ना नहीं पलटा, जिससे राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं को फील गुड मिला होगा। प्रशांत किशोर अपने 8 मिनट के भाषण में कुछ पर्सनल होते भी दिखे जब उन्होंने 2015 के बिहार चुनाव में नीतीश के नेतृत्व में महागठबंधन की जीत को लेकर अहसान भरी बातें करनी शुरू कर दी। पीके ने यहां तक कह दिया कि अगर वो 2015 में मदद नहीं करते तो नीतीश आज संन्यास लेकर कहीं बैठे होते।

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प्रशांत किशोर जब रैली में पहुंचे तो दूसरे जिलों से पटना आने वाले रास्तों पर लगे जाम को लेकर काफी खिन्न नजर आए। जय बिहार से शुरुआत के फौरन बाद वो जाम, प्रशासन और नीतीश पर आ गए। पांच लाख लोगों के आने की बात करते हुए पीके सुनाने लगे कि प्रशासन को पहले बताया गया था कि इतने लोग आ रहे हैं, इतनी गाड़ियां आ रही हैं लेकिन इंतजाम नहीं हुआ। चार घंटे से वो प्रशासन के हाथ-पैर जोड़ रहे हैं लेकिन कुछ हो नहीं रहा। 2 लाख से ज्यादा लोग पटना के इर्द-गिर्द भूखे-प्यासे जाम में बसों में बैठे हैं। लोग पैदल यहां आ रहे हैं। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि प्रशासन की मदद से नीतीश ने लोगों को रोकने का काम किया है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जिन लोगों ने कई लाख लोगों को मुझसे नहीं मिलने दिया है, उनको तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार में बदलाव की आंधी को कोई नहीं रोक सकता है। नीतीश सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील करते हुए प्रशांत ने लोगों से पूछा कि अगर मोदी जी आकर कहेंगे कि नहीं उखाड़ना है तो नहीं मानेंगे ना। फिर पूछा कि लालू, मोदी, नीतीश का राज चाहिए या जनता का राज चाहिए। फिर दावा करने लगे कि छह महीने के लिए कमर कस लो, नवंबर में आपको जनता की सरकार बनाकर देंगे।

इसके बाद पीके ने कहा कि भाषण खत्म लेकिन फिर बोलने लगे। कहा कि आज इन लोगों ने जो पाप किया है, उसका पूरा हिसाब आपके गांव, आपके प्रखंड में आकर लेंगे। 2015 के विधानसभा चुनाव के हवाले से प्रशांत किशोर कहने लगे- “प्रशासन की मदद से लोग को रोकने की कोशिश की है, इस आदमी की खैर नहीं है। अगर 2015 में इसकी मदद नहीं की होती तो नीतीश कुमार संन्यास लेकर कहीं बैठे होते। और आज बहुत बड़ा होशियार बन रहे हैं। आपने गांव-देहात में सुना होगा। जो शादी कराता है, वही श्राद्ध कराता है। तो इनका पूरा उपाय, राजनीतिक श्राद्ध जन सुराज के लोग करेंगे, ये संकल्प लेकर जाइए।।”

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