मध्यप्रदेश

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राहत, हाई कोर्ट से 18 साल बाद न्याय मिला

जबलपुर
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए 18 साल आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया है और उसे बरी किया है। अपने इस फैसले में न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने ग्राम पोंडी, पाटन, जबलपुर निवासी लोक सिंह को 18 वर्ष बाद दोषमुक्त करार दे दिया। उसके विरुद्ध ट्रायल कोर्ट की ओर से पारित आदेश अनुचित पाकर निरस्त कर दिया गया।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

ट्रायल कोर्ट ने उसे 18 साल पहले 1 वर्ष के कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना राशि जमा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की व्यवस्था दी गई थी। इस सजा के विरुद्ध पहले सेशल कोर्ट में अपील की गई, जहां ट्रायल कोर्ट का आदेश यथावत रखा गया। इसीलिए हाई कोर्ट में रिवीजन दायर की गई।
 
यह था मामला
हाई कोर्ट में लोक सिंह का पक्ष अधिवक्ता प्रमेंद्र सेन व प्रवीण सेन ने रखा। उन्होंने दलील दी कि 16 फरवरी, 2004 को बेलखेड़ा पुलिस ने 54 लीटर देसी शराब जब्त करने का अपराध पंजीबद्ध कर लिया था। उसके विरुद्ध आबकारी अधिनियम अंतर्गत मामला बनाया गया था। 28 अगस्त, 2006 को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, पाटन की कोर्ट ने सजा सुना दी। जिसके विरुद्ध 2007 में हाई कोर्ट की शरण ले ली गई थी।
 
दरअसल, यह मामला दुर्भावनावश फंसाए जाने से संबंधित था। अवैध शराब से लोक सिंह का कोई सरोकार नहीं था। इसीलिए वह अपनी बेगुनाही साबित करने जमानत हासिल करने के बाद से लंबे समय तक इंसाफ की लड़ाई लड़ता रहा। हालांकि अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया और 18 साल बाद लोक सिंह को दोष मुक्त कर दिया गया है।

Related Articles

Back to top button