ग्वालियरमध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को लगा झटका, कूनो नेशनल पार्क में माता चीता नभा की हुई मौत

श्योपुर
 मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से दुखद खबर सामने आ रही है. नामीबिया से लाई गई मादा चीता नभा की मौत हो गई है. जिसकी जानकारी कूनो के द्वारा दी गई है. कूनो प्रबंधन ने बताया कि नामीबिया की 8 वर्षीय मादा चीता नभा की आज शनिवार को मौत हो गई. वह एक हफ्ते पहले अपने सॉफ्ट रिलीज बोमा के अंदर घायल अवस्था में पायी गई थी.

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क्या शिकार के दौरान घायल हुई चीता नभा
संभवतः वह शिकार के प्रयास के दौरान घायल हुई थी. अन्य चोटों के साथ उसके दोनों बाएं आगे एवं पिछले पैरों (Ulna and Fibula) में फ्रैक्चर पाया गया है. एक हफ्ते से उसका इलाज चल रहा था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी उसकी मृत्यु हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चीते की मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा.

31 से 30 रह गई चीतों की संख्या
कूनो नेशनल पार्क में अब 28 चीते मौजूद हैं. जिनमें 9 व्यस्क (6 मादा और 3 नर) और 17 भारतीय जन्में शावक हैं, सभी स्वस्थ हैं और अच्छे से विचरण कर रहे हैं. इसके अलावा, गांधीसागर अभ्यारण में दो नर चीते शिफ्ट हुए हैं. कूनो राष्ट्रीय उ‌द्यान में 26 चीतों में से 16 चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं. भारत में कुल चीतों की संख्या 30 रह गई है. वे कूनो नेशनल पार्क के वातावरण से पूर्णतः अनुकूलित हो गए हैं. साथ ही उन्होंने सह-शिकारियों के साथ रहना सीख लिया है और नियमित रूप से शिकार कर रहे हैं. हाल ही में सभी चीतों की एंटी एक्टो-परजीवी दवा सफलतापूर्वक लगायी गई है. दो माताएं, वीरा और नीरवा अपने नन्हे शावकों के साथ स्वस्थ हैं.

2022 में 70 साल बाद भारत आए थे चीते
बता दें कि भारत से कई सालों पहले विलुप्त हो गए थे. करीब 70 साल के बाद चीतों की पुनरुत्थान योजना के तहत 17 सितंबर 2022 को 8 चीते नामीबिया से मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे. 18 फरवरी 2023 को 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया गया. इन 20 चीतों के साथ धीरे-धीरे इन चीतों का कुनबा तो बढ़ा लेकिन कई चीतों की मौत भी हुई. 11 मार्च 2023 को चीता प्रोजेक्ट के तहत एक नर और एक मादा चीता को खुले जंगल में छोड़ा गया. इस बीच कूनो में खुशियों की किलकारी गूंजी, मादा चीता ज्वाला ने 4 शावकों को जन्म दिया. ये देश में चीतों की विलुप्ति के बाद भारत की धरती पर जन्मे पहले चीता शावक थे.

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