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भारत को ट्रंप नहीं भेजेंगे लेटर, टैरिफ घटाकर 20% से नीचे लाने पर सहमति संभव

नई दिल्ली
भारत और अमेरिका एक अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं, जिससे प्रस्तावित टैरिफ को 20% से नीचे लाया जा सकता है। यह समझौता भारत को क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में व्यापारिक रूप से अधिक अच्छी स्थिति में रखेगा। खबरों की मानें तो अमेरिका इस सप्ताह भारत को टैरिफ बढ़ाने की औपचारिक सूचना नहीं देगा, जबकि कई अन्य देशों को अप्रत्याशित रूप से 50% तक के टैरिफ का सामना करना पड़ा है। ट्रंप करीब 20 देशों को टैरिफ लगाने संबंधी लेटर भेज चुके हैं। जिनमें काफी सख्त चेतावनी और धमकियां तक दी गई हैं। हालांकि भारत को अभी इस तरह का कोई लेटर भेजने का इरादा नहीं है। इसकी वजह है- दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता।

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भारत पर 20% से नीचे लाया जा सकता है टैरिफ
ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह प्रस्तावित अंतरिम समझौता दोनों देशों को आगे की बातचीत के लिए समय देगा, जिससे भारत को लंबित मुद्दों को व्यापक समझौते से पहले सुलझाने का अवसर मिलेगा। इस समझौते की औपचारिक घोषणा किसी आधिकारिक बयान के माध्यम से की जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक रूप से अमेरिका ने भारत के लिए 26% का टैरिफ प्रस्तावित किया था, लेकिन अब इस दर को घटाकर 20% से नीचे लाया जा सकता है। साथ ही, अंतिम समझौते के तहत आगे और भी संशोधन की संभावना रखी जाएगी। हालांकि, अंतरिम समझौते की सटीक समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।

यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने ट्रंप प्रशासन के साथ व्यापार समझौते किए हैं। अब तक केवल ब्रिटेन ने ही अमेरिका के साथ औपचारिक व्यापार समझौता किया है। वहीं, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को 20% तक की शुल्क दरें घोषित की जा चुकी हैं, जबकि लाओस और म्यांमार को 40% तक के उच्च शुल्कों का सामना करना पड़ रहा है। भारत वियतनाम के साथ हुए समझौते की तुलना में अधिक अनुकूल समझौता चाहता है। वियतनाम 20% की उच्च शुल्क दर से चौंक गया था और अब उस दर को कम करने की मांग कर रहा है।

ट्रंप के निशाने पर कई देश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को NBC न्यूज को बताया कि वह उन देशों पर 15% से 20% की सामान्य टैरिफ दर लगाने पर विचार कर रहे हैं, जिन्होंने अभी तक अमेरिका के साथ कोई विशेष टैरिफ दर तय नहीं की है। वर्तमान में अधिकांश अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों के लिए औसत टैरिफ दर 10% है।

हालांकि भारत ने वर्ष की शुरुआत में ही अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताएं शुरू कर दी थीं, हाल के महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में कुछ तनाव देखने को मिला है। ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत की ब्रिक्स सदस्यता को लेकर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने के संकेत मिले हैं। भारतीय वार्ता दल जल्द ही वाशिंगटन की यात्रा कर सकता है ताकि व्यापार वार्ताओं को गति दी जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पहले ही अपनी अंतिम पेशकश अमेरिका को दे चुका है और कुछ मुद्दों पर स्पष्ट रूप से ‘गैर-समझौतावादी रुख’ अपना चुका है।

भारत ने बता दी अपनी "लक्ष्मण रेखा"
व्यापार वार्ताओं में सबसे बड़ा अड़चन अमेरिका की यह मांग है कि भारत जैव-संशोधित (GM) फसलों को अनुमति दे, जिसे भारत ने किसानों की चिंता के चलते ठुकरा दिया है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में गैर-टैरिफ बाधाएं और फार्मा सेक्टर में नियामकीय चुनौतियां भी प्रमुख अवरोध बने हुए हैं। भारत ने इस समझौते के लिए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, खासकर कृषि और डेयरी क्षेत्रों में। भारतीय वार्ताकारों ने अमेरिका को स्पष्ट रूप से अपनी "लक्ष्मण रेखा" बता दी है, जिसमें डेयरी और कृषि उत्पादों पर रियायतों से इनकार शामिल है।

भारत ने पहले भी अपने डेयरी क्षेत्र को सभी व्यापार समझौतों में संरक्षित रखा है और इस बार भी यही रुख अपनाया है। इसके बदले, भारत ने टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में अमेरिकी उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच की पेशकश की है।भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की एक टीम जल्द ही वाशिंगटन का दौरा करने वाली है, ताकि इस समझौते को आगे बढ़ाया जा सके। भारत ने पहले ही अपनी सर्वश्रेष्ठ पेशकश ट्रम्प प्रशासन के सामने रख दी है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि वह कुछ मुद्दों पर समझौता नहीं करेगा।

 

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