मध्यप्रदेश

वाणिज्यिक न्यायालय का अहम फैसला: एमएसएमई परिषद का आदेश रद्द,राशि केजेएस सीमेंट प्लांट को वापस देने का दिया आदेश

वाणिज्यिक न्यायालय का अहम फैसला: एमएसएमई परिषद का आदेश रद्द,राशि केजेएस सीमेंट प्लांट को वापस देने का दिया आदेश

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वाणिज्यिक न्यायालय का बड़ा फैसला: MSME परिषद का आदेश रद्द, KJS सीमेंट को मिलेगी राशि वापस

KJS सीमेंट प्लांट को मिली राहत, MSME परिषद का आदेश हुआ खारिज

MSME परिषद का आदेश निरस्त, वाणिज्यिक न्यायालय ने राशि लौटाने का सुनाया फैसला

सतना के चर्चित ठेकेदार गुरजीत सिंह सेठी लकी की फर्म है उजस एसोसिएट्स

सतना
 वाणिज्यिक न्यायालय, भोपाल के न्यायाधीश विवेक सक्सेना की अदालत ने केस नम्बर एमजेसी एवी 30/2024 फाइलिंग नम्बर 3861/2024 के एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए केजेएस सीमेंट कंपनी के पक्ष में आदेश पारित किया है। अदालत ने मध्यप्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सुविधा परिषद (एमएसएमई एफसी) द्वारा पारित किए गए 3.27 करोड़ रुपये से अधिक के विवादित पुरस्कार को रद्द कर दिया है। साथ कि पूरी राशि प्लांट को वापस देने का आदेश दिया है।

क्या था मामला

मामला यह था कि मेसर्स उजस एसोसिएट्स सतना ने केजेएस सीमेंट के विरुद्ध शिकायत दर्ज की थी कि कंपनी ने उनके द्वारा प्रस्तुत आरए बिलों का भुगतान नहीं किया। इस आधार पर उजस एसोसिएट्स ने एमएसएमई अधिनियम की धारा 18 के तहत दावा दायर किया, जिस पर एमएसएमई परिषद ने 6 सितंबर 2023 को एकतरफा निर्णय सुनाते हुए उजस एसोसिएट्स को ₹3,27,20,150/- की राशि प्रदान करने का आदेश पारित कर दिया था। इस निर्णय को मेसर्स केजेएस सीमेंट ने वाणिज्यिक न्यायालय में चुनौती दी और कहा कि उनके और उजस एसोसिएट्स के बीच कोई विधिवत कार्य अनुबंध या समझौता नहीं था। केवल एक कार्य आदेश जारी किया गया था, जो 'वर्क कॉन्ट्रैक्ट' की श्रेणी में आता है और इस प्रकार यह मामला एमएसएमई परिषद के अधिकारिता क्षेत्र से बाहर है। साथ ही परिषद ने अधिनियम की धारा 18(2) और 18(3) के तहत अनिवार्य सुलह प्रक्रिया का पालन नहीं किया। दूसरी ओर, उजस एसोसिएट्स ने आपत्ति दर्ज की कि आवेदन विलंब से दायर किया गया है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। उन्होंने कई उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि एमएसएमई परिषद को विवाद निपटाने का अधिकार था।

अदालत ने माना कार्य अनुबंध के मामले में सुनवाई एमएसएमई परिषद के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि केजेएस सीमेंट द्वारा उजस एसोसिएट्स को दिया गया आदेश "सीमेंट मिल निर्माण" से संबंधित था, जो कार्य अनुबंध की श्रेणी में आता है। कार्य अनुबंध के मामले एमएसएमई परिषद के अधिकार क्षेत्र से बाहर होते हैं। न्यायालय ने यह भी माना कि याचिका सीमा अवधि के भीतर दायर की गई थी क्योंकि कंपनी ने पहले उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और वहां से स्वतंत्रता मिलने के बाद ही वाणिज्यिक न्यायालय में आवेदन दायर किया। 

एमएसएमई के पुरस्कार आदेश को तत्काल किया रद्द,राशि वापसी के आदेश

न्यायालय ने विस्तृत विवेचना करते हुए पाया कि एमएसएमई परिषद ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय पारित किया और आवश्यक कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया। इस आधार पर 6 सितंबर 2023 का पूरा पुरस्कार रद्द कर दिया गया। साथ ही, अदालत ने यह भी आदेश दिया कि इस मामले में केजेएस सीमेंट कंपनी द्वारा जमा की गई राशि उन्हें धारा 19 के तहत वापस की जाए। इस फैसले से साफ है कि वर्क कॉन्ट्रैक्ट संबंधी विवादों पर एमएसएमई परिषद का अधिकार क्षेत्र नहीं है और ऐसे मामलों का निपटारा अन्य विधिक मंचों पर ही किया जा सकता है।

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