राजस्थान

धाकड़ समाज के अधिवेशन में उठी 5 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण और जयपुर में छात्रावास की मांग

जयपुर

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राजधानी के मालवीय नगर स्थित पाथेय भवन में  धाकड़ समाज का अधिवेशन महज एक बैठक नहीं, बल्कि हक और पहचान की खुली घोषणा बनकर सामने आया। मंच पर नेताओं के भाषण थे, लेकिन नीचे बैठा समाज अपने भविष्य की रणनीति लिखता नजर आया। ओबीसी में 5% आरक्षण, जयपुर में छात्रावास और सामाजिक कुरीतियों पर सख्ती इन तीन मुद्दों ने पूरे कार्यक्रम का टोन तय किया।

अब भावनाएं नहीं, दबाव चाहिए
जैसे ही 5% ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठा, माहौल पूरी तरह बदल गया। मंच से साफ संदेश गया अब केवल मांग करने से काम नहीं चलेगा, ताकत दिखानी होगी। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि कई समाज राजनीतिक दबाव बनाकर अपना हिस्सा ले चुके हैं, लेकिन धाकड़ समाज अभी भी बिखरा हुआ है।

गुर्जर समाज का उदाहरण बार-बार मंच से गूंजा। संदेश साफ था एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार है।” कुछ प्रतिनिधियों ने तो यहां तक कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी, तो समाज आंदोलन की राह भी पकड़ सकता है।

हालांकि, युवा नेतृत्व ने संतुलित लाइन भी खींची। युवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्जुन धाकड़ ने कहा कि पहले संवाद और राजनीतिक पैरवी के रास्ते को पूरी ताकत से आजमाना चाहिए जब सत्ता में अपने लोग हैं, तो रणनीति भी समझदारी से बनानी होगी।

छात्रावास पर भावनाएं उफान पर
अधिवेशन का सबसे भावनात्मक पल तब आया, जब जयपुर में धाकड़ छात्रावास की बात उठी। मंच से सवाल उठा जब दूसरे समाजों की अपनी इमारतें हैं, तो हमारी पहचान कब बनेगी?”

यह सवाल सीधे दिल पर लगा और माहौल भावुक हो गया। इसी बीच ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बड़ा दांव खेलते हुए कहा

“समाज तैयारी करे, पैसा जुटाए, प्रबंधन तय करे जमीन दिलाने की गारंटी मेरी।”

इस एक बयान ने पूरे हॉल में जोश भर दिया। इसे अधिवेशन की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
डिजिटल बनो, तभी आगे बढ़ो

अधिवेशन में एक दिलचस्प मोड़ तब आया, जब पारंपरिक पत्रिका ‘धाकड़ बंधु’ को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाने की बात हुई। मंत्री नागर ने साफ कहा जो समाज डिजिटल होगा, वही संगठित और मजबूत बनेगा।”

मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने की पैरवी ने यह साफ कर दिया कि समाज अब केवल परंपराओं में नहीं, तकनीक में भी अपनी जगह बनाना चाहता है।
दहेज और फिजूलखर्ची पर सीधा हमला

अधिवेशन सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। सामाजिक सुधार पर भी मंच से कड़े संदेश दिए गए। दहेज प्रथा को लेकर मंत्री नागर ने साफ कहा बदलाव की शुरुआत अपने घर से करनी होगी।”

महिला नेताओं ने शादी-ब्याह में बढ़ते खर्च, दिखावे और डीजे संस्कृति पर सवाल उठाए। एक वक्ता ने तीखे अंदाज में कहा आज रिश्ते नहीं, मांग पत्र तय हो रहे हैं।”

हाड़ौती क्षेत्र से आए प्रतिनिधियों ने बताया कि वे प्री-वेडिंग शूट और मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

ईमानदारी ही सबसे बड़ी ताकत
पूर्व संसदीय सचिव नरेंद्र नागर ने समाज की सबसे बड़ी पूंजी “ईमानदारी” को बताया। उन्होंने कहा कि धाकड़ समाज की पहचान मेहनती और भरोसेमंद लोगों के रूप में है, और यही उसकी असली ताकत है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज को खुद को कमजोर मानने की मानसिकता छोड़नी होगी “जब सोच बदलेगी, तभी स्थिति बदलेगी।”

बेटियों की शिक्षा ने बदली तस्वीर
महिला शिक्षा पर भी सकारात्मक तस्वीर सामने आई। बताया गया कि समाज की बेटियां अब उच्च शिक्षा और नौकरियों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यहां तक कहा गया कि अब शिक्षित बेटियों के लिए योग्य वर ढूंढना भी चुनौती बनता जा रहा है जो बदलाव का संकेत है।

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