भारत

पाकिस्तान बॉर्डर पर अमेरिकी दूत का दौरा, वेस्टर्न कमांड पहुंचने से क्यों मची हलचल?

  नई दिल्ली
अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर और अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पापारो ने भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड (चंडीगढ़) का दौरा किया. यह दौरा पाकिस्तान बॉर्डर के बहुत करीब था. पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद किसी विदेशी डेलिगेशन का यह पहला ऐसा हाई-प्रोफाइल विजिट है. इसकी वजह से राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा और बवाल हो गया.

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

वेस्टर्न कमांड इतना महत्वपूर्ण क्यों?

    मुख्यालय: चंडीगढ़

    क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर के अखनूर से पंजाब के फाजिल्का तक पाकिस्तान बॉर्डर.
    200 से ज्यादा सैन्य बेस देखता है.

    पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के आतंकी कैंप और एयर बेस पर हमला करने में यह कमांड सबसे आगे था.

    इसलिए इस जगह का दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बहुत संवेदनशील माना जा रहा है.

क्या हुआ विजिट में?

भारतीय सेना ने उन्हें वेस्टर्न फ्रंट (पाकिस्तान बॉर्डर) की पूरी तैयारियों, ऑपरेशन सिंदूर और क्षेत्रीय स्थिरता में भारतीय सेना की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी. एडमिरल पापारो ने पहले ही पत्रकारों से कहा था कि भारतीय सेना का ऑपरेशन सिंदूर बहुत सटीक और शानदार था. लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने डेलिगेशन का स्वागत किया. 

विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल?

कांग्रेस और राजयसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत अब अपनी रणनीतिक नीतियां अमेरिका के हिसाब से बना रहा है. उन्होंने ट्रंप के 'मैंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाया' वाले बयान का जिक्र किया. कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा कि सरकार पाकिस्तान के ISI को भी पठानकोट एयरबेस दिखा चुकी है, अब अमेरिका को संवेदनशील जगह दिखा रही है.

लेकिन सच्चाई क्या है?

ऐसे विजिट बिल्कुल नई बात नहीं हैं. भारत और अमेरिका के बीच मिलिट्री-टू-मिलिट्री एक्सचेंज का पुराना कार्यक्रम है. पहले भी विदेशी राजनयिक कमांड हेडक्वार्टर विजिट कर चुके हैं. भारतीय राजनयिक भी अमेरिका के पेंटागन और CIA हेडक्वार्टर जाते रहे हैं.

असली मैसेज क्या है?

यह विजिट सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए नहीं थी. इसका बड़ा संदेश है…

    अमेरिका भारत के साथ रक्षा संबंध और मजबूत करना चाहता है. 
    चीन के खिलाफ इंडो-पैसिफिक में भारत को काउंटर-बैलेंस के रूप में देखता है.
    पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं रहा (ट्रंप की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी में पाकिस्तान का नाम तक नहीं).
    भारत को रूस से हथियार खरीदने से धीरे-धीरे दूर करना चाहता है (अमेरिका भारत का तीसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है, फ्रांस के बाद).
    अभी हाल ही में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद संबंधों में नया रीसेट हुआ है. एडमिरल पापारो ने कहा – भारत-अमेरिका रक्षा संबंध तेजी से ऊपर जा रहे हैं. 

विजिट के पीछे राजनीतिक बवाल तो है, लेकिन रणनीतिक रूप से यह भारत-अमेरिका के बढ़ते विश्वास और साझेदारी का संकेत है. भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है, लेकिन चीन जैसे बड़े खतरे के सामने मजबूत साथी ढूंढ रहा है. 

Related Articles

Back to top button