मध्यप्रदेश

जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ और मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर

भोपाल

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पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की पहल पर मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद और ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ संस्था के सहायक संगठन 'व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया' के मध्य एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। प्रदेश में नदियों के उद्गम क्षेत्रों में वाटरशेड विकास तथा पारंपरिक चंदेला-बुंदेला तालाबों के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए यह महत्वपूर्ण कदम ।

इस समझौते का उद्देश्य राज्य में जल संरक्षण और संवर्धन को वैज्ञानिक ढंग से सशक्त करना है। यह एमओयू ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत कार्यान्वित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के विभिन्न जलग्रहण क्षेत्रों में कार्य योजना बनाना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण देना, समुदाय आधारित जागरूकता अभियान चलाना और जल प्रबंधन को सशक्त करना प्रमुख उद्देश्य हैं। इस अवसर पर ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ की ओर से व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया के अध्यक्ष रोहित सिक्का एवं मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद की ओर से आयुक्त अवि प्रसाद ने हस्ताक्षर किए।

व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया द्वारा पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक विभिन्न हितधारकों और ग्रामीण समुदायों को जल संरक्षण, जल प्रदूषण नियंत्रण एवं जल गुणवत्ता सुधार पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसरो सहित अन्य एजेंसियों से प्राप्त रिमोट सेंसिंग डेटा के आधार पर वैज्ञानिक कार्य योजना तैयार की जाएगी। जल संचयन की संभावनाओं को SIPRI सॉफ्टवेयर के माध्यम से चिन्हित किया जाएगा और इसमें सुधार हेतु तकनीकी सहायता भी दी जाएगी। मनरेगा के अमले को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (ई-डीपीआर) बनाने में सहयोग प्रदान किया जाएगा।

फील्ड डेटा संग्रहण हेतु मोबाइल ऐप्स की सुविधा दी जाएगी एवं कार्यों की सतत निगरानी की जाएगी। जल हितधारकों को युवा नेतृत्व प्रशिक्षण, जल चेतना शिविर जैसे कार्यक्रमों से जोड़कर समुदाय-नियंत्रित जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को पानी संबंधी मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा। जल नीति और अधिनियमों के प्रति सभी हितधारकों के बीच जागरूकता पैदा की जाएगी। इस समझौते के तहत तैयार की गई कार्य योजनाओं का क्रियान्वयन मनरेगा के नियमानुसार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जो कार्य मनरेगा में अनुमन्य नहीं हैं, उन्हें अन्य स्रोतों से वित्तीय संसाधन जुटाकर पूरा किया जाएगा। यह सहयोग प्रदेश में जल संरक्षण को एक व्यापक सामाजिक आंदोलन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक पहल है।

 

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