मध्यप्रदेश

MSP बढ़ने से सरकार को राहत, किसानों को मिली निराशा, केवल 15 रुपये का बोनस मिलेगा

भोपाल
 मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गेहूं उपार्जन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप इस साल भी किसानों से 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई बढ़ोतरी के कारण राज्य सरकार पर बोनस का आर्थिक बोझ काफी कम हो गया है। इस बार किसानों को बोनस के रूप में केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे।

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बोनस के गणित से समझिए सरकार को राहत
पिछले साल गेहूं का समर्थन मूल्य 2,275 रुपये था, जिस पर राज्य सरकार ने 125 रुपये का बोनस देकर 2,400 रुपये में खरीदी की थी। बाद में इसे बढ़ाकर 2,600 रुपये करने का निर्णय लिया गया था, जिससे सरकार पर 175 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भार आया था। लेकिन इस साल केंद्र सरकार ने MSP बढ़ाकर 2,585 रुपये कर दी है। ऐसे में मुख्यमंत्री की 2,600 रुपये की घोषणा को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को अब अपनी जेब से केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलाने होंगे। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को भेज दिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है।

फरवरी से पंजीयन और मार्च में खरीदी शुरू
प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। फरवरी माह से किसानों का पंजीयन शुरू किया जाएगा और मार्च से खरीदी प्रक्रिया प्रारंभ होगी। पिछले वर्ष करीब 9 लाख किसानों से 77 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदा गया था, और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद में सरकार ने व्यवस्थाएं बनाना शुरू कर दिया है।

वित्तीय संकट के बीच राज्य की एजेंसियां ही करेंगी खरीदी
नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड वर्तमान में लगभग 72 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबे हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से सीधी खरीदी का प्रस्ताव दिया था ताकि ब्याज का बोझ कम हो सके, लेकिन केंद्र से अभी तक सहमति नहीं मिली है। ऐसे में पुरानी व्यवस्था के तहत ही राज्य की एजेंसियां गेहूं का उपार्जन करेंगी।

 

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