हमर छत्तीसगढ़

मनेन्द्रगढ़ में अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया जश्ने-ईद-मिलादुन्नबी

इस्लाम धर्म के लोगों के लिए यह दिन बहुत खास है। ईद-मिलाद-उन-नबी है, इसे ईद-ए-मिलाद-उन-नबी या ईद-ए-मिलाद भी कहा जाता है। यह दिन पैगंबर मोहम्मद के जन्म की खुशी के रूप में मनाया जाता है

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मनेन्द्रगढ़/एमसीबी
जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी को लेकर बारिश के बीच मनेन्द्रगढ़ के विभिन्न मोहल्लों से होते हुए आसपास के कोयलांचल क्षेत्र झगराखाण्ड, खोंगापानी और नई लेदरी में पुरे अकीदत व एहतराम के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का जुलूस निकाल कर त्योहार धूमधाम से मनाया गया। भाईचारा का पैगाम देने वाले त्योहार ईद मिलाद-उन-नबी को लेकर जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में मोहम्मदिया जुलूस निकाला गया। इसमें रंग-बिरंगी पोशाकें और हाथों में इस्लामिक झंडा लिए बड़े और खास कर छोटे-छोटे बच्चे जुलूस की शोभा बढ़ा रहें थे। त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनायें रखने के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किया गया था।जानकारी हो इस्लाम धर्म में हर साल रबी उल अव्वल महीने की 12 तारीख को मिलादुन्नबी को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का त्योहार मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। पैगंबर मोहम्मद का जन्म मक्का में हुआ था। उन्होंने अल्लाह के संदेशों को सभी तक पहुंचाया। इस त्योहार को नबी मुहम्मद के जीवन और उनके संदेश के प्रति समर्पित रूप से मनाया जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों में एकत्र होकर नमाज पढ़ते हैं। इस दिन मस्जिद को खूब अच्छे ढंग से सजाया जाता हैं। कहा जाता हैं कि इस दिन पवित्र कुरान के पाठ से अल्लाह की रहमत बरसती है। साथ ही इस दिन लोग अपने परिजनों और करीबियों से मिलकर मिलाद-ए-नबी की शुभकामनाएं भी देते हैं।

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