ग्वालियरमध्यप्रदेश

मुरैना में नकली DAP खाद बनाने वाले प्लांट का भंडाफोड़, PM की तस्वीर वाले 300 बोरे मिले

मुरैना
 प्रदेश के मुरैना में किसानों को नकली खाद तैयार करने के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। जेवराखेरा रोड पर बुधवार शाम पुलिस ने एक प्लॉट में छापा मारकर नकली डीएपी खाद की पैकिंग का काम पकड़ा। मौके पर हरे रंग के उन बोरों में खाद भरा जा रहा था, जिन पर इंडियन पोटाश लिमिटेड कंपनी का नाम, प्रधानमंत्री की तस्वीर और भारतीय जन उर्वरक परियोजना का उल्लेख था। पुलिस को मौके से पैक किए हुए 300 बोरे मिले, जबकि एक कमरे में सफेद बोरों में भरा खाद भी बड़ी मात्रा में रखा था।

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स्टेशन रोड थाना प्रभारी दर्शन शुक्ला के मुताबिक जेवराखेरा रोड पर कॉलोनी की प्लॉटिंग के बीच एक प्लॉट में दीवार खड़ी कर टिनशेड बनाया गया था। इसी के भीतर आठ लोग बोरों की पैकिंग कर रहे थे। जांच में पता चला कि सफेद बोरों से खाद निकालकर उसे हरे रंग की पैकिंग में भरा जा रहा था, ताकि वह असली डीएपी खाद जैसा दिखाई दे।

पानी में डालते ही घुल गया खाद
पुलिस ने मौके पर मिली सामग्री की जांच के लिए कृषि विभाग को सूचना दी। इसके बाद उप संचालक कृषि अनंत सड़ैया अपनी टीम के साथ पहुंचे। अधिकारियों ने खाद का नमूना पानी में डालकर देखा तो वह तत्काल मिट्टी की तरह घुल गया।

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डीएपी में मौजूद नाइट्रोजन का हिस्सा आसानी से घुल सकता है, लेकिन इसमें मौजूद फास्फोरस को पूरी तरह घुलने में 10 से 12 घंटे तक लग सकते हैं। मौके पर खाद के इस तरह घुलने के बाद अधिकारियों ने उसके नकली होने की आशंका जताई।

अधिकारियों का कहना है कि सामान्य किसान के लिए केवल देखकर खाद की असलियत पहचानना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में इस तरह की मिलावट किसानों तक पहुंचने पर उनकी फसल और खेती की लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि, खाद की गुणवत्ता और उसकी वास्तविक संरचना की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच महत्वपूर्ण होगी।

300 बोरे पैक मिले
छापे के दौरान पुलिस को मौके पर पैकिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीन भी मिली। बाहर खड़े एक मिनी लोडिंग वाहन में डीएपी खाद के आठ बोरे रखे हुए थे। पूछताछ में सामने आया कि कुछ समय पहले ही एक लोडिंग वाहन से नकली बताए जा रहे खाद के बोरे वहां से भेजे गए थे।

पुलिस ने मौके पर मिली खाद को जब्ती में लेकर जांच शुरू की। अब यह पता लगाने की जरूरत है कि खाद कहां से लाया जा रहा था, उसकी पैकिंग किसके निर्देश पर की जा रही थी और पहले भेजे गए बोरों की आपूर्ति किन लोगों तक हुई।

दिहाड़ी पर लाए थे मजदूरों को
प्लॉट में खाद की पैकिंग करते मिले आठ लोगों ने पूछताछ में बताया कि वे भवन निर्माण में मजदूरी करते हैं। उनके मुताबिक, सुबह दो लोग उनके पास आए थे और 700 रुपये मजदूरी देने की बात कहकर काम पर लाए थे। उन्हें बताया गया था कि रेत को बोरों में भरना है, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद सफेद बोरों से सामग्री निकालकर हरे बोरों में भरने का काम मिला।

मजदूरों ने बताया कि काम पर लाने वाले दोनों व्यक्ति बाद में वापस नहीं लौटे। उन्होंने अपने नाम श्रीनिवास जाटव, देवेंद्र जाटव, रामअवतार पिप्पल, सतीश जाटव, गिर्राज जाटव, लाखन जाटव और बारेलाल पचौरी बताए। सभी ने अपना निवास उत्तमपुरा बताया। उपलब्ध जानकारी में आठवें मजदूर का नाम स्पष्ट नहीं है।

अधूरे भवन में चल रहा था पूरा खेल
जिस प्लॉट में खाद की पैकिंग की जा रही थी, वहां एक कच्चा और अधूरा भवन बना हुआ था। भवन की दीवार पर 'यह जगह बिकाऊ है' लिखा था। इसी स्थान पर खाद को कथित तौर पर असली कंपनी की पैकिंग जैसा रूप देने का काम चल रहा था।

 

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