मध्यप्रदेश

3 अप्रेल से उपभोक्ताओं के सामने विक्रेता को दूध का परीक्षण कर फैट और एसएनएफ की मात्रा बतानी होगी

इंदौर

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मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में दूध की गुणवत्ता और उपभोक्ता स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इसके तहत सभी दूध विक्रेताओं और डेयरी संचालकों को अपने प्रतिष्ठानों पर फैट (वसा) मापक यंत्र रखना अनिवार्य किया गया है।

 यह कदम अपमिश्रित और मिलावटी दूध के विक्रय की रोकथाम और संक्रामक रोगों की रोकथाम के उद्देश्य से उठाया गया है। कलेक्टर ने बताया, भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया गया है। दूध में फैट व एसएनएफ की मात्रा, आवक व विक्रय की जानकारी डिस्प्ले करना भी जरूरी है।

कैन पर लिखनी होगी मात्रा की जानकारी
उपभोक्ताओं के सामने विक्रेता को दूध का परीक्षण कर फैट और एसएनएफ की मात्रा बतानी होगी। इस यंत्र के इस्तेमाल और संचालन की जानकारी भी उपभोक्ताओं को देने का दायित्व विक्रेताओं का रहेगा। जो दूध विक्रेता डोर-टू-डोर सप्लाय करते हैं उन्हें अपने साथ मापक यंत्र रखना होगा या दूध के डिब्बों, कैन पर मात्रा को प्रतिदिन लिखकर प्रदर्शित करना होगा। आदेश 3 अप्रेल तक लागू रहेगा।

इस कारण लिया फैसला
नए नियम की जानकारी देते हुए कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि दूध में मिलावट के कई मामले सामने आ रहे हैं. दूध में जहरीली चीजें मिलाकर बेची जा रही है. ऐसे में मिलावटी दूध पर रोक लगाने के लिए ये फैसला लिया गया है. इससे संक्रामक रोगों पर भी लगाम लगाई जा सकेगी. भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत इस आदेश को जारी किया गया है. अब दूध में मौजूद फैट की मात्रा से लेकर कई जानकारी देना जरुरी है.

भरना पड़ेगा जुर्माना
नए आदेश के मुताबिक़, अगर दुग्ध उत्पादकों ने नियमों को नहीं माना तो उन्हें इसके लिए सजा दी जाएगी. विक्रेता को बताना होगा कि दूध में कितना फैट है. साथ ही इसमें मौजूद एसएनएफ की मात्रा भी बतानी होगी. इसके लिए यंत्र जारी किया गया है जिसमें दूध डालते ही उसकी सारी असलियत सामने आ जाएगी. वहीं जो उत्पादक लोगों को घर पर दूध की सप्लाई करते हैं, उन्हें डिब्बे पर इसकी जानकारी देना जरुरी है.

सिर्फ 10 रुपए में कीजिए दूध में मिलावट की जांच

 जो न केवल सस्ती हो, बल्कि कोई भी इसका इस्तेमाल बिना किसी परेशानी के कर सके। एनडीआरआई करनाल ने एक दूध परीक्षण किट विकसित की है जो काफी सस्ती है और बहुत कम समय में दूध में मिलावट का पता लगा सकती है। स्ट्रिप की मदद से दूध में यूरिया, स्टार्टर, डिटर्जेंट पाउडर, ग्लूकोज न्यूट्रलाइजर, रिफाइंड तेल और हाइड्रोजन परऑक्साइड की मात्रा की जांच की जा सकती है। मिलावट की जांच के लिए संस्थान ने आठ तरह की स्ट्रिप विकसित की है।  स्ट्रिप को दूध में डुबोया जाता है। इससे सिर्फ 8-10 मिनट में दूध में मिलावट की जांच की जा सकती है।

हर मिलावटी तत्व के लिए अलग स्ट्रिप होती है। दूध में मिलावट हो तो स्ट्रिप का रंग बदल जाता है, जिसके आधार पर पता लगाया जा सकता है कि दूध में कितनी मिलावट है। उन्होंने कहा कि दूध में फैट प्रतिशत बढ़ाने के लिए वनस्पति तेल मिलाया जाता है लेकिन वनस्पति तेल दूध में नहीं घुल सकता है। इसे दूध में मिलाने के लिए डिटर्जेंट पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। दूध में अगर डिटर्जेंट पाउडर मिलाया  गया है तो स्ट्रिप का रंग नीला हो जाता है।

दूध में यूरिया का पता लगाने के लिए एक पीले कागज की स्ट्रिप विकसित की गई है। इसे दूध में डुबोया जाता है। अगर दूध में यूरिया का मिलावट है  तो पीली स्ट्रिप लाल रंग की हो जाती है।  अगर दूध में यूरिया की मिलावट नही है तो स्ट्रिप गुलाबी या पीले रंग की हो जाती है । इसका परिणाम तीन मिनट में आ जाता है।

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