राजस्थान

राजस्थान में बीज, खाद और कीटनाशकों की जांच होगी डिजिटल, अब न निरीक्षक चुन पाएंगे लैब और न लैब को पता चलेगी पहचान

राजसमंद
 किसान खेत में अच्छी फसल की उम्मीद से बीज बोता है, खाद डालता है और कीटनाशकों का इस्तेमाल करता है। लेकिन कृषि आदान ही अमानक निकल जाएं तो उसकी मेहनत और पूंजी दोनों जोखिम में पड़ सकती हैं। इसी चिंता को देखते हुए राजस्थान में बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की गुणवत्ता जांच को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने की पहल की गई है। अब नमूना लेने वाले निरीक्षक को यह पता नहीं होगा कि जांच किस प्रयोगशाला में होगी और प्रयोगशाला को भी संबंधित डीलर या निर्माता की पहचान नहीं बताई जाएगी। जयपुर के पंत कृषि भवन में राजस्थान सरकार के कृषि विभाग और भारतीय डाक विभाग के राजस्थान परिमंडल के बीच इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एग्री क्यूएमएस ऐप से नमूना संग्रहण से लेकर परीक्षण और परिणाम प्रबंधन तक डिजिटल निगरानी होगी, जबकि प्रयोगशाला का आवंटन रैंडम आधार पर किया जाएगा।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

ऐप में दर्ज होगा नमूने का पूरा रिकॉर्ड
नई व्यवस्था में कृषि आदान निरीक्षक मौके पर ही एग्री क्यूएमएस मोबाइल ऐप के माध्यम से नमूने का विवरण दर्ज करेंगे। संग्रहण स्थल की जीपीएस आधारित जियो-टैगिंग, उत्पाद की तस्वीरें और जरूरी दस्तावेज डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होंगे। प्रत्येक नमूने के लिए क्यूआर कोड बनाया जाएगा तथा उसे टैम्पर-प्रूफ पैकिंग में सीलबंद किया जाएगा। इससे नमूनों की अदला-बदली और छेड़छाड़ की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।

न निरीक्षक चुनेंगे लैब, न लैब को पता होगी पहचान
ऐप के जरिए प्रयोगशाला का चयन रैंडम तरीके से होगा। निरीक्षक अपनी पसंद की लैब में नमूना नहीं भेज सकेंगे। वहीं, प्रयोगशाला को डीलर या निर्माता की पहचान नहीं दी जाएगी। इस दोहरी गोपनीयता से जांच में पक्षपात, अनुचित प्रभाव और संभावित मिलीभगत की गुंजाइश कम करने का प्रयास किया गया है। परीक्षण परिणाम ऑनलाइन दर्ज होंगे, जिससे जवाबदेही भी बढ़ेगी।

डाक विभाग करेगा सुरक्षित परिवहन
कृषि विभाग के नमूने जयपुर भेजे जाएंगे। वहां पहचान गोपनीय रखने की प्रक्रिया के बाद भारतीय डाक विभाग की स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट सेंटर सेवाओं से अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाए जाएंगे। नमूनों की ट्रैकिंग भी हो सकेगी। समझौता तीन वर्ष के लिए किया गया है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकेगा। डाक विभाग कृषि विभाग को ‘बुक नाउ पे लेटर’ सुविधा भी देगा।

किसानों के हितों को मिलेगी मजबूती
अमानक, नकली और घटिया गुणवत्ता वाले कृषि आदानों की निष्पक्ष जांच से उनकी पहचान और नियमानुसार कार्रवाई में मदद मिलेगी। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने तथा उनकी लागत, पैदावार और आय से जुड़े हितों की रक्षा करने का प्रयास होगा। गुणवत्ता मानकों का पालन करने वाले व्यापारियों और निर्माताओं को भी निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। कृषि आदानों की गुणवत्ता का सीधा संबंध उत्पादन लागत, उत्पादकता और किसान की आय से है। भारतीय डाक विभाग के सहायक पोस्ट मास्टर जनरल (पार्सल एवं लॉजिस्टिक्स) सुभाष चन्द मीणा ने नमूनों को सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने के लिए सहयोग का आश्वासन दिया। इस अवसर पर कृषि आयुक्तालय के अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक और गुणवत्ता नियंत्रण शाखा के अधिकारी-कर्मचारी तथा डाक विभाग के राजेश पारीक, रोहित जैन और नफीस खान मौजूद रहे।

Related Articles

Back to top button