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तिरुपति लड्डू विवाद पर जांच पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका ठुकराई

आंध्र प्रदेश
तिरुपति लड्डू विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तिरुपति मंदिर में मिलावटी घी से लड्डू बनाए जाने के मामले में एसआईटी ने जांच पूरी कर ली है। राज्य सरकार ने अगर अगल से जांच करवाई है तो इसमें भी कुछ गलत नहीं है। स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय जांच समिति के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था।

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पर्याप्त आधार नहीं
स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय समिति के गठन को चुनौती दी थी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि याचिका के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। एक सदस्यीय समिति और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई एसआईटी की जांच एक दूसरे को ओवरलैप नहीं कर रही हैं। दोनों जांचों का दायरा अलग-अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक जांच और चार्जशीट से जुड़ी आपराधिक प्रक्रिया में कोई टकराव नहीं हैं। ऐसे में दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं।

एसआईटी की जांच में क्या पाया गया
एसआईटी की जांच में कहा गया है कि भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जिस घी का इस्तेमाल होता था उसमें केमिकल और पामोलिन तेल का इस्तेमाल किया जाता था। ईडी पता लगाएगी कि इस तरह का मिलावटी घी बेचकर किसने कितने पैसे कमाए हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहीं भी चर्बी वाले घी की बात नहीं कही गई थी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) नेताओं पर तिरुपति में लड्डू (प्रसाद) बनाने में इस्तेमाल घी में कथित मिलावट के मामले में दूसरों पर दोष मढ़कर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करने का शनिवार को आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने पलनाडु जिले के विनुकोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि वाईएसआरसीपी नेताओं ने तिरुपति लड्डू में मिलावट की जांच में कई बाधाएं खड़ी कीं और यहां तक ​​कि उच्चतम न्यायालय का रुख भी किया।

आंध्र सरकार ने एसआईटी की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए भी एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की है। आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति गठित की जो दोषी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सिफारिश करेगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त सीबीआई नीत विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच पूरी करने और आरोपपत्र दाखिल करने के बाद इस समिति का गठन किया गया है।

 

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