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चीनी रक्षा मंत्री से वन टू वन मीटिंग में भी राजनाथ ने किया पाकिस्तानी आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र

नई दिल्ली/ शंघाई  

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भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh),  शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल हुए. चीन के चिंगदाओ में रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने सदस्यों से आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ़ एकजुट होने की गुजारिश की. चीन के इस दौरे में राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष डोंग जून से भी मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया.

राजनाथ ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अब पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की सैद्धांतिक स्थिति है. इसी संदर्भ में उन्होंने उल्लेख किया कि भारत-चीन संबंधों की सकारात्मक गति में नई जटिलताओं को जोड़ने से बचना चाहिए. रक्षा मंत्री ने भारत-चीन सीमा तनाव को खत्म करने के लिए सुझाव भी दिया:

    विघटन प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए.

    बॉर्डर पर तनाव कम करने की कोशिश होनी चाहिए.

    सीमाओं के सीमांकन और डीलिमिटेशन के टारगेट को हासिल करने के लिए सीमा विवाद को हल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है.
    संबंधों को बेहतर करने और मतभेदों को खत्म करने के लिए नई प्रक्रियाओं को तैयार करने के लिए मौजूदा एसआर स्तर की व्यवस्था का उपयोग किया जाना चाहिए.

चीनी रक्षा मंत्री से राजनाथ की मुलाकात

चीन के रक्षा मंत्री डोंग जून के साथ मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "चीन के चिंगदाओ में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डॉन जून के साथ बातचीत हुई. हमने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक और दूरदर्शी विचारों का आदान-प्रदान किया." 

उन्होंने आगे कहा कि करीब 6 साल के अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर अपनी खुशी जाहिर की. दोनों पक्षों के लिए यह जरूरी है कि वे इस सकारात्मक गति को बनाए रखें और द्विपक्षीय संबंधों में नई जटिलताओं को जोड़ने से बचें.

राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री को बिहार की एक मधुबनी पेंटिंग भेंट की. इस पेंटिंग की उत्पत्ति बिहार के मिथिला इलाके में हुई है. इसे मिथिला या मधुबनी आर्ट के रूप में भी जाना जाता है. इसकी विशेषता चमकीले रंगों और विरोधाभासों या पैटर्न से भरी रेखा चित्र हैं. ये पेंटिंग अपने आदिवासी रूपांकनों और चमकीले मिट्टी के रंगों के उपयोग के कारण लोकप्रिय हैं.

 

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