मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश विधानसभा शीतकालीन सत्र शुरू, कांग्रेस विधायकों ने कफ सिरप मौतों के विरोध में बच्चों के पुतले और ‘पूतना’ के साथ किया प्रदर्शन

भोपाल 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज प्रारंभ हो गया है। पहले दिन विपक्षी विधायकों ने छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विधायक अपने हाथों में बच्चों के पुतले और 'पूतना' को लेकर पहुंचे। विपक्ष ने सरकार को ही पूतना बताया और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया।

विधानसभा में शून्य काल के दौरान कांग्रेस ने हंगामा किया। सत्र की कम अवधि को लेकर उठाए सवाल। कहा जब विधायक जनहित के मुद्दे उठा ही नहीं सकते हैं तो फिर सत्र बुलाने का क्या मतलब। आसंदी के सामने आकर की नारेबाजी। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की आज बैठक है, उसमें इस विषय पर चर्चा की जा सकती है। अध्यक्ष की व्यवस्था देने के बाद कांग्रेस के सदस्य अपने स्थान पर लौटे।

बता दें सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान 4 दिन ही विधानसभा की बैठकें होंगी। 3 दिसंबर को भोपाल गैस त्रासदी की बरसी पर स्थानीय अवकाश के कारण विधानसभा की भी छुट्‌टी रहेगी।

सत्र में विपक्षी विधायक सीहोर की वीआईटी यूनिवर्सिटी में छात्रों को खराब भोजन-पानी मिलने के कारण हुए विवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठाएंगे। अतिवृष्टि से नुकसान और मुआवजे का मुद्दा भी गूंजेगा।

दिसंबर में सत्र की अधिसूचना जारी होने से अब तक विधानसभा सचिवालय में 751 तारांकित और 746 अतारांकित प्रश्नों को मिलाकर 1497 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। ध्यानाकर्षण की 194, स्थगन प्रस्ताव की 06, अशासकीय संकल्प की 14, शून्यकाल की 52, नियम-139 की 02 सूचनाएं जबकि 15 याचिकाएं मिली हैं। 2 शासकीय विधेयक भी प्राप्त हुए हैं।

विधानसभा सत्र में पेश होंगे ये दो विधेयक मध्य प्रदेश सरकार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब तक पार्षद ही अध्यक्ष चुनते थे, लेकिन संशोधन के बाद अध्यक्ष को जनता सीधे चुनेगी। इसके साथ ही राइट टू रिकॉल की व्यवस्था भी लागू होगी। यानी जनता यदि अध्यक्ष के काम से नाखुश है तो वोट देकर उन्हें हटा भी सकेगी।

मध्यप्रदेश सरकार ने व्यापार और दुकानों से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है। पिछले हफ्ते हुई कैबिनेट की बैठक में दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को स्वीकृति दी गई थी। अब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। साथ ही, दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम में संशोधन के तहत दुकानदारों और कामगारों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश देना जरूरी होगा।

दुकान खोलने और संचालन के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया भी सरल बनाई जाएगी। सरकार का तर्क है कि यह व्यवस्था कामगारों के स्वास्थ्य, बेहतर कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।

नई व्यवस्था में ये होगा

    20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में बिना श्रम आयुक्त की अनुमति के निरीक्षण नहीं हो सकेगा।
    इससे सूक्ष्म और लघु व्यापारियों को अनावश्यक कार्रवाई और दबाव से राहत मिलेगी।
    सभी प्रक्रियाएं पोर्टल पर ही होंगी। रजिस्ट्रेशन, रिनुअल, संशोधन और बंद होने की सूचना भी डिजिटल हो जाएगी।

बदलाव 7 दिन में अपडेट करना अनिवार्य दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 के मुताबिक, अब रजिस्ट्रेशन शुल्क अधिकतम ₹2,500 होगा। कर्मचारियों की संख्या या अन्य प्रमुख बदलाव होने पर 7 दिन के भीतर पोर्टल पर अपडेट करना जरूरी होगा।

प्रतिष्ठान बंद होने पर 10 दिन के भीतर पोर्टल पर सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना दर्ज होते ही रजिस्ट्रेशन खुद ही हट जाएगा।

श्रम विभाग के अनुसार संशोधन का उद्देश्य

    प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाना।
    व्यापार-मित्र वातावरण तैयार करना।
    छोटे व्यापारियों तक स्व-प्रमाणन की सुविधा पहुंचाना।
    निरीक्षण का अनावश्यक दबाव कम करना।
    राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करना।

 

Related Articles

Back to top button