मध्यप्रदेश

एमपी हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर सुनाया बड़ा फैसला, लौटानी होगी राशि

जबलपुर
 एमपी हाई कोर्ट ने  निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर बड़ा फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने कहा कि अगर स्कूलों ने 2018 या उससे पहले 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो वो पैसा माता-पिता को वापस करना होगा।

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यह मामला पैरेंट्स द्वारा स्कूलों की अवैध फीस वसूली के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने स्कूलों को फीस जमा करने के लिए भी निर्देश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।
कैसे शुरू हुआ मामला

मामले की शुरुआत पैरेंट्स द्वारा निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने से हुई। अभिभावकों का कहना था कि स्कूल ज्यादा फीस वसूल रहे हैं। इसके कारण उन्हें आर्थिक स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस याचिका पर सुनवाई हुई।
नहीं हो रहा नियमों का पालन

हस्तक्षेपकर्ता के वकील सुरेंद्र वर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि एमपी सरकार द्वारा बनाए गए स्कूल विनिमय अधिनियम 2018 के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। पैरेंट्स से एक बार में फीस वसूली के आदेश दिए जा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अभिभावक फीस क्यों नहीं जमा कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने जवाब दिया कि अभिभावकों ने 70% फीस तो जमा कर दी है। लेकिन बाकी फीस का मामला कोर्ट में है, इसलिए वो फीस अभी जमा नहीं की गई है।
निजी स्कूलों की दलील

निजी स्कूलों की तरफ से वकील अंशुमान सिंह ने 13 अगस्त 2024 के हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2018 के नियम के हिसाब से 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने की अनुमति है। उसी के अनुरूप काम किया जा रहा है।
वापस करनी होगी फीस- कोर्ट का फैसला

इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूलों को 50 प्रतिशत फीस तीन दिन में और बाकी 50 फीसदी फीस तीन महीने के अंदर जमा करनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर 2018 या उससे पहले किसी स्कूल ने 10 परसेंट से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो वह ज्यादा वसूली गई राशि पैरेंट्स को वापस करनी होगी। यह फैसला अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। इससे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगने की उम्मीद है।

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