मध्यप्रदेश

24 थानों का नया रूप: अब ‘न्याय सेवा सदन’, बालाघाट पुलिस ने गिनीज बुक के लिए भेजा प्रस्ताव

बालाघाट
पुलिस और जनता के बीच सकारात्मक संबंधों को मजबूती देने की दिशा में बालाघाट पुलिस ने अनूठी पहल की है। ये पहल बदलाव की है, जिसमें बालाघाट के सभी 24 पुलिस थानों को नए रंग-स्वरूप में परिवर्तित किया गया है।

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पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा का कहना है कि इस पहल का यही उद्देश्य है कि चाहे वह महिला हो, युवती हो या अन्य कोई भी व्यक्ति, वह बिना डरे थाने में जाकर अपनी शिकायत कर सके। पुलिस स्टाफ उसके साथ अच्छा व्यवहार करे, थाने सुंदर और व्यवस्थित हों। फाइलों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड का बेहतर संधारण और डिजिटलाइजेशन हो।

आइएसओ प्रमाणित किया गया

जिले के सभी 24 थानों, छह एसडीओपी कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा पुलिस लाइन बालाघाट को आइएसओ प्रमाणित किया गया है। 32 पुलिस संस्थानों को मुख्यमंत्री ने प्रदान किए प्रमाण पत्र खास बात है कि सभी थाने उन्नयन, सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण हैं।

ये अंतरराष्ट्रीय मापदंड पर तैयार किए गए हैं, जिन्हें सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आइएसओ प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। जिले के सभी थानों और एसडीओपी कार्यालयों को महज चार महीने में नए स्वरूप में तैयार किया गया है।
पहले अव्यवस्था का आलम रहता था

इन संस्थानों में पहले अव्यवस्था का आलम रहता था। फाइलें धूल खाती थीं। कंप्यूटर कक्ष, मुंशी कक्ष, थाना प्रभारी कक्ष, विवेचक कक्ष, मालखाना आदि में फाइल सहित अन्य सामग्री अव्यवस्थित ढंग से रखी होती थीं, लेकिन अब इन्हें व्यवस्थित किया गया है। हर कक्ष की रंगाई-पोताई के साथ फाइलों के संधारण के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजा प्रस्ताव

बालाघाट पुलिस ने एक-साथ 32 पुलिस संस्थानों के आइएसओ प्रमाणीकरण की उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय पटल पर दर्ज कराने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए प्रस्ताव भेजा है। बालाघाट पुलिस ने थानों के उन्नयन के लिए पांच बिंदुओं पर काम किया है। इन्हीं बिंदुओं पर आइएसओ प्रमाणीकरण हुआ है।
थानों में इन पांच बिंदुओं पर किया काम

1. सैनेटाइजेशन: थाना परिसर में गंदगी को दूर किया गया। गार्डन तैयार कर परिसर में सुंदर और स्वच्छ बनाया गया। पुलिस ने सिर्फ थानों की अस्वच्छता को दूर नहीं किया बल्कि अव्यवस्थित दस्तावेज, फाइल, पुराने रिकार्ड को व्यवस्थित किया गया।

2. डिजिटाइजेशन: पुलिस ने सभी दस्तावेजों, फाइलों को फिजिकल सुरक्षित रखने के साथ इन्हें डिजिटल रूप में भी सुरक्षित किया है। ताकि कोई दस्तावेज भौतिक रूप से गुम भी हो, तो वह डिजिटल प्लेटफार्म में उपलब्ध हो और कार्रवाई में बाधा न आए।

3. आधारभूत संरचना: फरियादी के थाने पहुंचने पर उसे रिस्पेशन डेस्क उपलब्ध कराई गई है। फरियादी के लिए डे आफिसर को तैनात किया गया है। क्योंकि हर बार थाना प्रभारी थाने में हो ये संभव नहीं होता। डे आफिसर उस शिकायत पर निश्चित समय पर कार्रवाई करेगा।

4. समीक्षा बैठक कक्ष: थाना परिसर में रोज की कार्रवाइयों की समीक्षा के लिए पृथक कक्ष तैयार किया गया है। इस कक्ष में थाना प्रभारी अपने सभी विवेचकों के साथ बैठक लेंगे। जनता के साथ शांति समिति जैसी बैठकें भी कर सकेंगे। एसपी बैठक की निगरानी करेंगे।

5. साइबर सारथी: बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए पुलिस ने प्रत्येक थाने में साइबर सारथी के रूप में सात पुलिसकर्मियों का स्टाफ होगा, जिन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये स्टाफ फंड फ्रिजिंग करेगा और लोगों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करेगा।

 

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