भारत

पीएम मोदी ने कहा- भविष्य के लिए मजबूत और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा बनाएं

नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर देते हुए वैश्विक स्तर पर इस दिशा में प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। वह यूरोप में पहली बार आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर" को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और फ्रांसीसी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा, "मैं अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस सरकार का समर्थन के लिए धन्यवाद करता हूं। साथ ही आगामी संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं देता हूं।"

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उन्होंने कहा कि तटीय और द्वीपीय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अत्यधिक खतरे में हैं। उन्होंने कहा, "इस सम्मेलन की थीम है: तटीय क्षेत्रों के लिए एक लचीले भविष्य का निर्माण। भारत और बांग्लादेश में चक्रवात 'रेमाल', कैरेबियन में 'हैरिकेन बेरिल', अमेरिका में 'हेलीन', दक्षिण-पूर्व एशिया में 'यागी' और फिलीपींस में 'उसागी' जैसी आपदाओं से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।"

प्रधानमंत्री ने भारत की पुरानी आपदाओं की याद दिलाते हुए कहा, "भारत ने 1999 के सुपर साइक्लोन और 2004 की सुनामी की पीड़ा को झेला है। हमने इससे सीखते हुए लचीलापन अपनाया और तटीय इलाकों में चक्रवात शेल्टर बनाए। साथ ही, 29 देशों के लिए एक सुनामी चेतावनी प्रणाली विकसित करने में भी भारत ने मदद की।" भारत की वैश्विक भूमिका पर उन्होंने कहा कि "कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई)" 25 छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ कार्य कर रही है, जिसमें मजबूत घर, अस्पताल, स्कूल, ऊर्जा प्रणालियां, जल सुरक्षा तंत्र और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली शामिल हैं।

उन्होंने कहा, "मैं प्रशांत, हिंद महासागर और कैरेबियन क्षेत्रों से आए मित्रों का स्वागत करता हूं। मुझे यह जानकर खुशी है कि अफ्रीकी संघ भी अब सीडीआरआई का हिस्सा बन गया है।" प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक प्राथमिकताओं में सबसे पहले शिक्षा और कौशल विकास को रखा। उन्होंने कहा, "आपदा प्रबंधन से जुड़े कोर्स, मॉड्यूल और कौशल विकास कार्यक्रम उच्च शिक्षा का हिस्सा बनने चाहिए। इससे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार होंगे।"

उन्होंने साझा सीख पर बल देते हुए कहा, "दुनिया भर के कई देश आपदाओं का सामना कर लचीलापन अपनाते हैं। इनके अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए एक वैश्विक डिजिटल भंडार बनाना उपयोगी होगा।" वित्तपोषण पर उन्होंने कहा कि आपदा लचीलापन के लिए नवाचारी वित्त की आवश्यकता है। हमें ऐसे कार्यक्रमों की रूपरेखा बनानी चाहिए जो विकासशील देशों को आसानी से वित्त उपलब्ध करा सकें।

प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से कमजोर देशों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, "हम छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को बड़े महासागरीय देश मानते हैं। इनकी संवेदनशीलता को देखते हुए इन्हें विशेष ध्यान मिलना चाहिए।" अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से ऐसा बुनियादी ढांचा बनाने की अपील की जो समय और आपदाओं की कसौटी पर खरा उतरे। उन्होंने एक मजबूत और प्रेरणादायक भविष्य का निर्माण करने का आह्वान किया।

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