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‘जी राम जी’ विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों का रोजगार

नई दिल्ली 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-जी राम जी) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। इस तरह मनरेगा की जगह अब 'जी राम जी' कानून बन गया है। ग्रामीण परिवारों के लिए अब हर साल मजदूरी रोजगार गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ा दिया गया है। संसद में गुरुवार को विपक्ष के विरोध के बीच जी राम जी विधेयक पारित हुआ। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखा है। मनरेगा योजना की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष के आरोपों को चौहान ने सिरे से खारिज कर दिया।
 
शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया, ‘कांग्रेस नीत सरकार ने मनरेगा को भी ताकत के साथ लागू नहीं किया और प्रधानमंत्री मोदी ने इसे सही से क्रियान्वित किया।’ उन्होंने यूपीए और राजग सरकार के समय इस योजना के क्रियान्वयन की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय जहां 1660 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए थे, वहीं मोदी सरकार में 3210 करोड़ श्रम दिवस का सृजन किया गया। मोदी सरकार से पहले इस योजना में महिलाओं की भागीदारी 48 प्रतिशत थी, जो इस सरकार के समय 56.73 प्रतिशत हो गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी ने तो गांधी का नाम चुराने का पाप किया है।’

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क्या है जी राम जी कानून
जी राम जी कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और कृषि उत्पादकता को मजबूत करना है। विधेयक में ग्रामीण परिवारों के लिए सालाना रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है, साथ ही स्थानीय नियोजन, श्रमिक सुरक्षा और योजनाओं के एकीकरण पर जोर दिया गया है। इस कानून का मकसद ग्रामीण आय सुरक्षा को मजबूत करना, अग्रिम पंक्ति की योजनाओं का एकीकरण और कृषि-रोजगार संतुलन है। सरकार का कहना है कि यह कानून ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा।

 

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