मध्यप्रदेश

प्रोत्यूष बालापुरे ने 10वीं CBSE बोर्ड में हासिल किए 99% अंक, स्व-अध्ययन और दृढ़ संकल्प से रचा कीर्तिमान

सिवनी मालवा
प्रोत्यूष बालापुरे (कक्षा 10वीं, CBSE) ने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए हैं। जिस के लिए उनके सागर पब्लिक स्कूल भोपाल ने उन्हें 135000.00  छात्रवत्ति भी प्रदान की है।  इस उपलब्धि के पीछे छात्र का दृढ़ संकल्प, स्व-अध्ययन तथा परिवार और शिक्षकों का सहयोग प्रमुख रहा।

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छात्र के पिता डॉ. सतीश बालापुरे, शासकीय कन्या महाविद्यालय, सिवनी मालवा में पदस्थ हैं, जबकि माता सुमना बालापुरे मत्स्य विभाग में क्षेत्रीय प्रबंधक, भोपाल  के रूप में कार्यरत हैं।

छात्र ने बताया कि उसने 10वीं कक्षा की शुरुआत से ही यह तय कर लिया था कि उसे बोर्ड परीक्षा में 99% अंक प्राप्त करने हैं। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उसने अपने नाम के साथ सभी विषयों में पूरे अंक लिखकर कई स्टिकी नोट्स बनाए और उन्हें अपने PC, स्टडी टेबल, ड्रेसिंग मिरर, यहाँ तक कि अपनी पानी की बोतल पर भी चिपका दिया।

सिलेबस की शुरुआत अच्छी रही, जिसका पूरा श्रेय शिक्षकों को जाता है। पढ़ाई के साथ-साथ छात्र ने क्विज़ और एलोक्यूशन जैसी गतिविधियों में भाग लेकर अपनी अन्य क्षमताओं को भी निखारा। छात्र के अनुसार, उसके शिक्षक अत्यंत सहयोगी रहे और किसी भी कॉन्सेप्ट में कठिनाई होने पर उन्होंने तुरंत सहायता प्रदान की।

पूरे वर्ष छात्र ने स्व-अध्ययन जारी रखा, हालांकि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव भी आए। प्री-बोर्ड 1 में अपेक्षित अंक नहीं मिलने पर छात्र ने इसे चुनौती के रूप में लिया और अपने कमजोर पक्षों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया।

परीक्षाओं से पहले छात्र ने अपने सीनियर्स से पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र (PYQs) और तैयारी सामग्री एकत्र की, जिससे उसे CBSE के प्रश्नों के पैटर्न को समझने में सहायता मिली। प्रत्येक PYQ पर उसने स्वयं नोट्स तैयार किए, जिसमें प्राप्त अंक, गलतियाँ और सुधार के बिंदु शामिल थे।
अंतिम दो महीनों में छात्र ने पूरी तरह से PYQs पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा। विशेष रूप से उत्तर लेखन और कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर कार्य किया गया।

हाल ही में घोषित परिणाम में छात्र ने 495 अंक प्राप्त कर 99% अंक हासिल किए। इस सफलता में माता-पिता, दादी, चाचा, बड़े पापा   का महत्वपूर्ण योगदान रहा। छात्र के अनुसार, कठिन समय में माता-पिता ने उसे प्रेरित किया और उसका हौसला बढ़ाया। माता ने विभिन्न स्थानों से अध्ययन सामग्री जुटाकर सहायता की, जबकि पिता ने कठिन वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझाया। बहन श्रुष्टि एवं  देव्यानी  ने भी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया।

शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा पिछले 10 वर्षों के प्रश्न-पत्रों का अभ्यास करने से छात्र को उत्तर लेखन शैली और समय प्रबंधन में विशेष लाभ मिला।
छात्र ने आगे की पढ़ाई के लिए कॉमर्स विषय का चयन किया है और उसका लक्ष्य एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सलाहकार बनना है, जिसके लिए वह निरंतर प्रयासरत है।

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