राजनीति

जाति सर्वे को लेकर हर समुदाय में बेचैनी, सिद्धारमैया बोले- सभी की एक ही अपील

बेंगलुरु

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

कर्नाटक में आज से जाति जनगणना की शुरुआत हो रही है। 15 दिनों तक यह सर्वे चलेगा और फिर जल्दी ही रिपोर्ट भी जारी किए जाने की तैयारी है। सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले का उनकी कैबिनेट के ही कुछ सदस्यों समेत बड़े पैमाने पर लोग विरोध कर रहे हैं। लेकिन अल्पसंख्यक, दलित और ओबीसी वर्ग की राजनीति करने वाले सिद्धारमैया का कहना है कि वह राहुल गांधी की लाइन पर चल रहे हैं, जिनका कहना है कि जातिगत जनगणना से सही आंकड़े आएंगे और फिर उसके आधार पर योजनाएं बनाने से सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने में मदद मिलेगी।

राज्य के प्रभावशाली लिंगायत, वोक्कालिगा, कुर्बा, मुस्लिम, जैन और ब्राह्मण समुदाय के लोगों की मीटिंग हुई है। इन बैठकों में शीर्ष नेताओं ने समाज से अपील की है कि वे 15 दिनों तक चलने वाली जातिगत जनगणना में अपनी उपजाति ना बताएं। सिर्फ जाति का ही जिक्र करें ताकि उपजाति बताने से संख्या कम ना नजर आए। एक बार पहले भी सूबे में सर्वे में हुआ था, जिसे लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय की ओर से खारिज किया गया था। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस सर्वे को स्थगित करने की मांग की है या फिर इसे तीन महीने में कराने की मांग की है ताकि कोई खामी न रह जाए।

वोक्कालिगा समाज के एक मठ के स्वामी निर्मलानंद ने कहा कि हमें संदेह है कि यह सर्वे सही से होगा। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य की आबादी 7 करोड़ हैं और महज 15 दिन में ही सर्वे करने की बात कही जा रही है। इससे पहले तेलंगाना में 65 दिन तक सर्वे चला था, जबकि वहां की आबादी हमारे यहां के मुकाबले आधी यानी करीब 3.5 करोड़ ही है। शुक्रवार को वीरशैव-लिंगायत समाज की हुबली में मीटिंग हुई थी। इस बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि खुद को लिंगायत ही लिखें। उसमें कोई उपजाति ना बताएं। इसके अलावा मुस्लिम, जैन, ब्राह्मण समाज के लोगों की भी मीटिंग हुई। इन बैठकों में प्रस्ताव दिया गया कि अपनी जाति ही लिखें, उपजाति का जिक्र ना करें।

जैसे कहा गया कि ब्राह्मण समुदाय के लोग अपनी जाति में ब्राह्मण ही लिखें। कोई उपनाम आदि ना लिखें। इसी तरह जैन समुदाय के लोगों का भी कहना है कि जैन ही लिखा जाए। इसके अलावा मुसलमानों की मीटिंग में कहा गया कि अपना धर्म इस्लाम ही लिखें और जाति के स्थान पर मुस्लिम लिखा जाए। वोक्कालिगा समाज में भी काफी सक्रियता दिख रही है। वहीं डीके शिवकुमार ने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।

Related Articles

Back to top button