मध्यप्रदेश

MP की एयर एंबुलेंस सेवा पर हर महीने ₹2.5 करोड़ खर्च, फिर भी सिर्फ 5 मरीजों को फायदा!

भोपाल

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की महत्वाकांक्षी योजना 'पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा' की उपयोगिता पर सवाल उठाने लगे हैं। इस सेवा के उपयोग में न जनता रुचि ले रही, न ही जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। मई 2024 में प्रारंभ हुई इस सेवा से अभी तक 85 रोगियों को ही प्रदेश के भीतर या दूसरे राज्य में उपचार के लिए पहुंचाया गया है। खास बात यह है कि एंबुलेंस का उपयोग हो या नहीं, पर सरकार की तरफ से एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी को प्रतिमाह नियत घंटों के किराये का भुगतान करने की शर्त है।

सरकार हेलीकाप्टर का 40 घंटे और हवाई जहाज का 60 घंटे का फिक्स किराया कंपनी को देती है, पर इतने घंटे भी सेवा नहीं ले पा रही है। हेलीकाप्टर का किराया प्रतिघंटे सवा तीन लाख रुपये और हवाई जहाज का दो लाख रुपये है। यानी एक करोड़ 30 लाख रुपये हेलीकाप्टर और एक करोड़ 20 लाख रुपये हवाई जहाज का किराया सरकार प्रति माह चुका रही है, जबकि प्रतिमाह औसतन पांच रोगी ही योजना का लाभ उठा रहे हैं।

लाभ उठाने वालों में सबसे ज्यादा रीवा के

कुल 85 मरीजों ने अब तक योजना का लाभ उठाया है, जिनमें सबसे ज्यादा रीवा के 30 (35 प्रतिशत) रोगी हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि रीवा उप मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राजेन्द्र शुक्ल का गृह जिला है। वह यहां बैठकों और आम सभाओं में सेवा का उपयोग करने के लिए अपील करते रहे हैं। इस तरह लगभग 16 माह में प्रदेश के 55 में से 17 जिलों के रोगियों को ही इसका लाभ मिला है। यह स्थिति तब है जब खुद मुख्यमंत्री इस सेवा का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करते रहे हैं।

ऐसे ले सकते हैं मदद

आयुष्मान योजना के हितग्राहियों के लिए यह सेवा निश्शुल्क मिलती है। अन्य मरीजों को निर्धारित दर पर भुगतान करना होता है। जरूरत के मुताबिक, रोगी को एक शहर से दूसरे शहर या दूसरे राज्य एयरलिफ्ट किया जाता है। दूसरे राज्य के अस्पताल भेजने के लिए सीएमएचओ की अनुशंसा पर कलेक्टर अनुमति देते हैं।

रीवा दूर होने के कारण लोग इस सेवा की मदद ले रहे हैं

    भौगोलिक रूप से रीवा दूर होने के कारण त्वरित उपचार के लिए लोग इस सेवा की मदद ले रहे हैं। दूसरा यह कि लोगों में वहां जागरूकता भी अच्छी है। अन्य जिलों के अधिकारियों को भी प्रचार-प्रसार के लिए लगातार कहा जा रहा है। – तरुण राठी, आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा

 

Related Articles

Back to top button