भारत

अगले 36 घंटे भारी: इन राज्यों में 25-30 जून तक बारिश का रेड अलर्ट

नई दिल्ली 
देश के मानसून ने फिर गति पकड़ ली है और अब यह उत्तर भारत के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की इस बढ़ती रफ्तार के कारण अगले 36 से 48 घंटों में कई राज्यों में भारी बारिश और तूफान की संभावना जताई जा रही है। खासकर दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने इन इलाकों के लिए अलर्ट जारी कर सतर्क रहने को कहा है। आइए जानते हैं मानसून की वर्तमान स्थिति और आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम कैसा रहने वाला है।

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मानसून की स्थिति:
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब उत्तरी अरब सागर से होते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा बाड़मेर, जोधपुर, जयपुर, आगरा, रामपुर और बिजनौर होते हुए हिमालय की ओर बढ़ रही है, जिससे बारिश का प्रभाव और अधिक व्यापक होगा।

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट:
अगले 36 से 48 घंटे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मूसलाधार बारिश के साथ आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की गई है। विशेष रूप से पश्चिमी यूपी के जिलों में 25 और 27 जून को भारी से अति भारी बारिश का अनुमान है, जबकि पूर्वी यूपी में 28 जून को बारिश की तीव्रता बढ़ने की संभावना है। इसके चलते बिजली गिरने और स्थानीय जलजमाव की घटनाओं से सतर्क रहने को कहा गया है।

दिल्ली-एनसीआर का मौसम:
राजधानी क्षेत्र में 25 से 27 जून के बीच मौसम सामान्य से बादल छाए रहेंगे, साथ ही हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। तेज़ हवा के झोंकों से भी लोगों को सावधानी बरतनी होगी।
 
उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भारी बारिश:
उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में 24 से 30 जून तक भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में 25 से 28 जून के बीच भी बारिश जारी रहेगी।

बाढ़ की संभावनाएं और सतर्कता:
मौसम विभाग ने उत्तराखंड, पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर) और पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का खतरा जताया है। नदियों के जलस्तर में वृद्धि को लेकर स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

 

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