मध्यप्रदेश

बेटे के लिवर और भतीजी की किडनी के बल पर आज विनोद जगर की सांसें चल रहीं

उज्जैन
 कहते हैं कि दुख में अगर कोई साथ देता है, तो वह परिवार ही है. जो कितनी भी विपरीत परिस्थिति में साथ खड़ी रहती है, कुछ ऐसा ही मामला उज्जैन के जगर परिवार से सामने आया है. विनोद जगर लिवर खराब होने से बीते 4 सालों से बीमार चल रहे थे, इतना ही नहीं लिवर के ट्रीटमेंट के दौरान उनकी एक किडनी भी खराब हो गई थी. लिवर और किडनी दोनों आर्गन खराब होने से विनोद जगर पर मानों दुखों का पहाड़ टूट गया, ऐसे में बेटे ने लिवर तो भतीजी ने किडनी देकर जान बचाई. इसके साथ ही यह मध्य प्रदेश का पहला डबल ऑर्गन ट्रांसप्लांट भी कहलाया.

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

लिवर के साथ किडनी भी खराब

दरअसल, 48 वर्षीय कॉन्ट्रेक्टर विनोद जगर बीते 4 सालों से लिवर खराब होने के कारण बीमार चल रहे थे. 4 साल चले ट्रीटमेंट के बाद उनकी एक किडनी ने भी साथ छोड़ दिया. विनोद जगर को जब डॉक्टर ने किडनी खराब होने की जानकारी दी, तो वो टूट गए. ऐसे में उन्होंने कई डॉक्टरों को दिखाया. इसके बाद इंदौर और अमहदाबाद के डॉ से सलाह लेने पर परिजनों को आखिर में अंग ट्रांसप्लान्ट का ही रास्ता नजर आया. ऐसे में विनोद जगर के 24 वर्षीय बेटे यश जगर व 32 वर्षीय विवाहित भतीजी सीमा यादव ने किडनी और लिवर देकर अपने पिता व चाचा विनोद जगर की जान बताई.

2021 में बीमारी का चला पता

जगर परिवार के दोनों बच्चों ने समाज में मिसाल पेश की. 6 मई को इंदौर के निजी अस्पताल में 16 घंटे चले इस ऑपेरशन में एक साथ दोनों ऑर्गन ट्रांसप्लान्ट किए गए. जिसे प्रदेश में पहला ऐसा ऑपेरशन माना जा रहा है, जिसमें पहली बार एक साथ दो ऑर्गन ट्रांसप्लान्ट किए गए हों. वहीं विनोद जगर के सबसे बड़े बेटे विनि जगर ने ईटीवी भारत से चर्चा में बताया कि "पिता की बीमारी का पता साल 2021 में चला था. डॉ के अनुसार 4 साल ट्रीटमेंट चलता रहा, लेकिन साल 2024 में डॉ ने किडनी खराब होना भी बताया.

बेटे ने लिवर तो भतीजी ने दी किडनी

विनि जगर ने कहा कि डॉक्टर ने बताया कि पिता कभी भी कोमा में जा सकते हैं. उनकी बॉडी बेसिक मूवमेंट करना बंद कर सकती है. परिवार ने ऑर्गन के लिए कई प्रयास किये, लेकिन असफलता मिली. ऐसे में परिवार के दो बच्चे विनोद जगह के लिए देवदूत बन खड़े हुए. बेटे यश और भतीजी सीमा ने चाचा को नई जिंदगी दी. विनी जगर ने यह भी बताया की परिवार में दादी, मां और हम तीन भाई हैं. सबके ब्लड ग्रुप देखे गए, मां और मेरा मैच नहीं हुआ. दादी की उम्र ज्यादा है, छोटा भाई 19 वर्ष का है, बीच वाला 24 वर्ष और फिर में. बीच वाले भाई यश का ब्लड ग्रुप मैच हुआ 0+, फिर उसने पिता को लिवर दिया.

16 घंटे चले ऑपरेशन में दो अंग ट्रांसप्लांट

जैसे तैसे लिवर की समस्या से निजात मिला, तो किडनी की समस्या आ खड़ी हुई. ऐसे में बड़े भाई की बेटी सीमा यादव जो विवाहित है और उनके 2 बच्चे हैं. उन्होंने कहा कि चाचा को मेरी किडनी दे सकते हैं. इसके बाद 6 मई को ऑपेरशन सक्सेस रहा. दोनों भाई बहन को अस्पताल से 13 मई तक डिस्चार्ज मिल गया है. पिता विनोद एडमिट हैं और 15 दिन में डिस्चार्ज हो जाएंगे. ये ऑपेरशन सुबह 07 बजे से शुरू हुआ जो रात 11 बजे तक चलता रहा.

विनी जगर के अनुसार डॉ अमित सिंह बरफा ने लिवर ट्रांसप्लांट किया और डॉ सनी मोदी ने किडनी. सीमा यादव जिसने किडनी डोनेट की, उन्हें डॉ के निर्देश हैं, वो कोई फिजिकल एक्टिविटी न करे. जबकि बेटे यश के लिए कहा गया एक वक्त के बाद लिवर रीजनरेट होगा. तब तक डॉ के गाइडेंस में रुटीन फॉलो करे.

Related Articles

Back to top button