मध्यप्रदेश

उमरिया जिले में हुई सबसे महंगी जमीन रजिस्ट्री, एक जमीन की रजिस्ट्री 17.53 करोड़ रुपए का राजस्व

उमरिया
 जिले में एक जमीन की रजिस्ट्री से 17 करोड़ 53 लाख रुपए का राजस्व मिला है। यह रजिस्ट्री मध्य प्रदेश के इतिहास में सबसे बड़ी रजिस्ट्रियों में से एक हो सकती है। यह रकम उमरिया जिले के सालाना राजस्व लक्ष्य, जो कि 21 करोड़ रुपए है, का एक बड़ा हिस्सा है। यह रजिस्ट्री संपदा 2.0 के माध्यम से हुई है। इसमें उमरिया और शहडोल जिलों के पांच गांवों की लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन 30 साल की लीज पर दी गई है।

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एमपी का छोटा सा जिला है उमरिया

उमरिया, जो कि एक छोटा सा जिला है। इस जिला ने एक ही रजिस्ट्री से राजस्व संग्रह में बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में तो करोड़ों की रजिस्ट्रियां आम हैं। लेकिन उमरिया जैसे छोटे जिले के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। जहां जिले का सालाना लक्ष्य ही 21 करोड़ है, वहां एक ही दिन में 17 करोड़ 53 लाख की रजिस्ट्री होना आश्चर्यजनक है।

संपदा 2.0 पोर्टल के जरिए हुई रजिस्ट्री

सब रजिस्ट्रार आशीष श्रीवास्तव ने इस रजिस्ट्री की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह रजिस्ट्री संपदा 2.0 पोर्टल के माध्यम से हुई है। इसमें उमरिया जिले के तीन और शहडोल जिले के दो गांव शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 2000 हेक्टेयर जमीन की 30 साल की लीज पर रजिस्ट्री हुई है। इससे सरकार को 17 करोड़ 53 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उमरिया जिले के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने आगे कहा कि और जहां तक मैं समझता हूं कि शहडोल संभाग की सबसे बड़ी रजिस्ट्री है। जब उनसे प्रदेश में इतनी बड़ी रजिस्ट्री के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वहीं पूंछा गया कि प्रदेश में इतनी बड़ी रजिस्ट्री सुनने को नही मिली है तो बोले कि शहडोल संभाग में तो नहीं है लेकिन प्रदेश की जानकारी नहीं है।

शहडोल संभाग के लिए है रेकॉर्ड

यह रजिस्ट्री न केवल उमरिया जिले के लिए, बल्कि पूरे शहडोल संभाग के लिए भी एक रिकॉर्ड हो सकती है। संपदा 2.0 के लागू होने के बाद से यह प्रदेश की सबसे बड़ी एकल रजिस्ट्री भी हो सकती है। इससे उमरिया जिले का नाम प्रदेश भर में चर्चा में आ गया है। यह रजिस्ट्री भविष्य में जमीनों की रजिस्ट्री के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकती है। इससे सरकार के राजस्व संग्रह में भी काफी मदद मिलेगी। यह एक मिसाल है कि कैसे छोटे जिले भी बड़े-बड़े कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।

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