मध्यप्रदेश

कटनी जमीन सौदा केस: निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया 13 दिन से फरार, गृह ग्राम में भी नहीं मिला सुराग

कटनी
 निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया पुलिस की पकड़ से दूर है। सीएसपी सहित उनके करीबी क्षितिज राज व मारूफ अहमद के खिलाफ कुठला थाने में मामला दर्ज हुए 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक तीनों में से किसी को भी पकड़ा नहीं जा सका।

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गृह ग्राम में भी पुलिस के हाथ लगी निराशा
बहुचर्चित जमीन की सौदेबाजी और भ्रष्टाचार के मामले में फरार निलंबित सीएसपी की तलाश में मंगलवार को टीम राजगढ़ जिले के पचोर स्थित सीएसपी के गृह ग्राम पहुंची, लेकिन वहां भी पुलिस को सीएसपी का कोई सुराग नहीं मिला। टीम ने परिजनों से जानकारी ली और उसके बाद खाली हाथ वापस लौट आई।

रमेश लोधी के दर्ज कराए गए कथन
दूसरी तरफ इसी मामले से जुड़े हत्या के आरोप में झिंझरी जेल में कैद रमेश लोधी को एसआईटी जिला न्यायालय लेकर पहुंची, जहां पर उसके कथन दर्ज कराए गए।

जमानत अर्जी खारिज, दस हजार का इनाम घोषित
सीएसपी की जिला अदालत से अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद भी पुलिस अब तक तीनों आरोपितों तक नहीं पहुंच सकी है। मामले में पुलिस ने सीएसपी सहित तीनों आरोपितों पर दस हजार रूपये का इनाम भी घोषित किया और लुक आउट नोटिस भी जारी कर दिया है।

क्या है मामला?
दरअसल, कटनी जिले के कुठला थाना में 19 अगस्त को दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 ने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरीं। शिकायतकर्ता आकाश लोधी ने आरोप लगाया कि करीब 1.07 करोड़ रुपये मूल्य की पैतृक जमीन की रजिस्ट्री तत्कालीन सीएसपी नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों ने दबाव बनाकर कराई। आरोप है कि जमीन के बदले केवल 15 लाख रुपये का चेक दिया गया, जबकि बाद में रजिस्ट्री निरस्त कर जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम दर्ज करा दी गई।

शिकायत में यह भी कहा गया कि जहां जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.46 लाख रुपये था, वहीं दस्तावेजों में इसकी कीमत महज 18.20 लाख रुपये दर्शाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की कमान पहले कटनी एएसपी कमल मौर्य ने संभाली। बाद में जांच जबलपुर एएसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई और इसके बाद कटनी जिले में एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया, जिसकी जिम्मेदारी एएसपी अंजना तिवारी को सौंपी गई।

जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7(सी), 12 और 13 भी जोड़ी गईं, जिससे मामला और गंभीर हो गया। जांच के बीच एसआईटी ने सील किए गए सीएसपी कार्यालय की सील खोलकर तलाशी ली और वहां से महत्वपूर्ण कागजी दस्तावेजों के साथ डिजिटल साक्ष्य जब्त किए। इन साक्ष्यों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है, ताकि पूरे मामले और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

इस बीच प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश लीला लोधी की अदालत ने नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापत्रे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, केस डायरी और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद दोनों को राहत देने से इनकार कर दिया।

न्यायालय के इस आदेश के बाद पुलिस के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता और मजबूत हो गया है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि एफआईआर दर्ज होने के 14 दिन बाद भी इनाम घोषित होने, लुकआउट नोटिस जारी होने, एसआईटी के गठन और लगातार दबिश के बावजूद आखिर तीनों आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर कैसे हैं? यही सवाल अब पूरे मामले की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी खड़े हो रहे हैं।

आरोपियों पर इनाम घोषित
उधर, फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस ने नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। साथ ही इनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किए गए, ताकि देश छोड़कर भागने की किसी भी कोशिश को रोका जा सके। हालांकि, इन सभी कार्रवाइयों के बावजूद तीनों आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। 

जमीन सौदे और पद के दुरुपयोग का है मामला
    निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद के खिलाफ जमीन सौदे और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों में एफआईआर दर्ज है।

    आरोप है की हत्या के मामले में आरोपित परिवार पर जमीन के सौदे को लेकर दबाव बनाया गया और कम कीमत में रजिस्ट्री करा ली गई। जांच के दौरान जमीन की कीमत और भुगतान को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आने की बात भी कहीं जा रही है।

 

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