मध्यप्रदेश

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने आयुष की उत्कृष्ट पद्धतियां अपनाएगा मध्यप्रदेश

भोपाल 

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मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए आयुष सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं जनोपयोगी बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में तमिलनाडु एवं केरल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित आयुष सेवाओं और अपनाई जा रही उत्कृष्ट पद्धतियों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मई 2026 को आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तमिलनाडु एवं केरल में संचालित आयुष सेवाओं का अध्ययन करने के लिए विभागीय दल भेजने के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशों के अनुपालन में आयुष विभाग के चार सदस्यीय दल ने तमिलनाडु एवं केरल का अध्ययन भ्रमण किया। दल ने दोनों राज्यों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष चिकित्सा की भूमिका, सेवाओं के संचालन की व्यवस्थाओं तथा प्रभावी एवं उत्कृष्ट पद्धतियों का अध्ययन किया।

अध्ययन भ्रमण से लौटने के बाद बुधवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में दल द्वारा उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार के समक्ष अध्ययन के निष्कर्षों एवं अनुशंसाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया।

मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप बनेगी कार्ययोजना

मंत्री श्री परमार ने अध्ययन के निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। आयुष चिकित्सा पद्धतियों की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए गर्भवती माताओं एवं नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

श्री परमार ने निर्देश दिए कि तमिलनाडु एवं केरल में अपनाई जा रही आयुष क्षेत्र की उत्कृष्ट पद्धतियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का मध्यप्रदेश की भौगोलिक, सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप अध्ययन कर व्यावहारिक एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि कार्ययोजना में ऐसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाए, जिनके माध्यम से गर्भावस्था के दौरान आवश्यक आयुष सेवाओं की उपलब्धता बढ़े, माताओं को स्वास्थ्य संबंधी उचित मार्गदर्शन मिले तथा सामान्य प्रसव को प्रोत्साहन देने के लिए प्रभावी सहयोग प्रदान किया जा सके।

श्री परमार ने अध्ययन से प्राप्त अनुभवों को केवल रिपोर्ट तक सीमित न रखते हुए चरणबद्ध तरीके से मैदानी स्तर पर लागू करने तथा इसकी प्रभावशीलता की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।

अनुभवों का उपयोग प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में होगा

अध्ययन दल द्वारा दोनों राज्यों में संचालित आयुष सेवाओं की व्यवस्थाओं, उपचार पद्धतियों और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित कार्यप्रणाली का अवलोकन किया गया। इन अनुभवों और अनुशंसाओं का उपयोग मध्यप्रदेश में आयुष सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा।

बैठक में आयुष विभाग के प्रमुख सचिव श्री शोभित जैन एवं आयुक्त आयुष श्रीमती आर. उमा माहेश्वरी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

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