मध्यप्रदेश

आलीराजपुर में मतांतरण के खिलाफ ग्राम सभाओं का अभियान, घर वापसी बनी मुख्य मिशन

छकतला
मतांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाके आलीराजपुर में अब ग्राम सभाएं मोर्चा संभाल रही हैं। पेसा अधिनियम के तहत गठित ग्राम स्तरीय समितियां अब मतांतरण (धर्म परिवर्तन) के खिलाफ संगठित कदम उठा रही हैं। इन समितियों का उद्देश्य है जो आदिवासी मूल संस्कृति से भटके हैं, उन्हें समझाइश के माध्यम से पुनः घर वापसी कराना।

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दुधवी गांव में परिवार की वापसी बनी उदाहरण
ऐसा ही एक ताजा उदाहरण सामने आया है ग्राम पंचायत करजवानी के ग्राम दुधवी से, जहां उकारिया पुत्र कदवा ने अपने पूरे परिवार के साथ सनातन धर्म में वापसी की है। इस निर्णय में गांव की ग्राम सभा का महत्वपूर्ण किरदार रहा। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना की वापसी का प्रतीक है।
 
मथवाड़ पंचायत में प्रस्ताव पर होगा फैसला
ग्राम पंचायत मथवाड़ के ग्रामसभा अध्यक्ष दिलीप पटेल ने बताया कि रविवार को पंचायत की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसमें गांव के मतांतरण कर चुके परिवारों को ससम्मान सनातन धर्म में लौटाने की प्रक्रिया को ग्राम सभा की मंजूरी दी जाएगी। यह प्रस्ताव पेसा अधिनियम के प्रविधानों के तहत पारित किया जाएगा।

पूर्व सरपंचों की पहल, गांव-गांव जा रहे जनप्रतिनिधि
ग्राम छकतला के पूर्व सरपंच उसान गरासिया ने जानकारी दी कि वे स्वयं मथवाड़, वाकानेर, करजवानी और आसपास के कई गांवों में जाकर ऐसे परिवारों से संवाद कर रहे हैं जो कभी अपनी मूल संस्कृति से दूर हो गए थे। उन्होंने बताया कि, जिन्होंने मतांतरण किया है, उनमें से अधिकतर अत्यंत गरीब और बीमार थे। कुछ को लालच देकर मत परिवर्तन कराया गया। लेकिन अब जब हम उन्हें समझा रहे हैं, तो लोग अपनी जड़ों की ओर लौटने को तैयार हो रहे हैं।

जनपद स्तर पर भी सक्रियता, ग्राम सभा बनी अधिकारों की आवाज
सोंडवा जनपद पंचायत अध्यक्ष रेवली उषानसिंह गरासिया ने बताया कि क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां पेसा एक्ट के तहत ग्राम सभा को जो विशेष अधिकार प्राप्त हैं, उनका उपयोग करते हुए धर्म परिवर्तन रोकने और पुनः मूल संस्कृति में लौटने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने कहा, हमारी परंपरा, रीति-रिवाज और आस्था हमारी पहचान है। पंचायतें अब यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कोई भी परिवार लालच या भयवश अपनी संस्कृति से दूर न हो।

पेसा अधिनियम बना आधार, 607 ग्राम सभाओं में सक्रिय समितियां
जिले के पेसा जिला समन्वयक प्रवीण कुमार चौहान के अनुसार पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में जिले में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। अब तक 607 ग्राम सभाओं में पेसा समितियों का गठन किया जा चुका है। ये समितियां न सिर्फ ग्रामों में अधिकारों की जानकारी फैला रही हैं, बल्कि सांस्कृतिक सुरक्षा को लेकर भी सजग हैं। चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम 2022 और ग्राम सभा गठन नियम 1998 के तहत ग्राम सभाओं को जो अधिकार दिए गए हैं, उनका उपयोग अब वास्तविक धरातल पर दिखने लगा है। कई ग्राम सभाओं ने तो अब विधिवत प्रस्ताव पारित कर ‘घर वापसी’ के अभियान को समर्थन दिया है।

जमीनी स्तर पर जनभागीदारी, सामाजिक समरसता की ओर कदम
पेसा अधिनियम के तहत गठित समितियां न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक चेतना का केंद्र बन रही हैं। ग्राम स्तरीय मोबिलाइज़र और ब्लाक समन्वयक जहां लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम सभाएं अब सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी सक्रिय हो चुकी हैं।

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