मध्यप्रदेश
मध्य प्रदेश में कई महिलाओं से छिन सकता है लाडली बहना योजना का लाभ
बहनों को अपात्र कर योजना से बाहर करनी की सरकार की साजिश-सैयद जाफर

भोपाल । मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना पर संकट के बदले मंडराने लगे हैं। उन महिलाओं को मिलने वाला लाभ छिन सकता है जिन्हें कुछ बदलाव के बाद लाभ मिला था।
कांगे्रस के महामंत्री सैयद जाफर ने महिला बाल विकास विभाग के पत्र को एक्स पर साझा करते हुए लाभ लेने वाली बहनों को अपात्र बताकर योजना से बाहर करने संबंधी आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
कांग्रेस प्रदेश महामंत्री जाफर ने एक्स पर लिखा है,लाड़ली बहना योजना में लाभ लेने वाली बहनों को आपत्र कर योजना से बाहर करनी की सरकार की साजिश है।पात्र-आपत्र के सरकारी आदेश को तत्काल रद्द करे प्रदेश सरकार। महिला एवं बाल विकास विभाग का आदेश निरस्त किया जाए। नई भाजपा सरकार ने दिया है अपात्र महिलाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना से बेदखल करने का आदेश।
उन्हांेने आगे कहा, कांग्रेस की मांग है कि बहनों को इस योजना के लाभ से वंचित करने की बजाय योजना में छूट गई बहनों को जोडऩे का अभियान शुरू किया जाए।लाखों महिलाएं अभी भी लाड़ली बहना के फायदे से वंचित है।चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने मध्यप्रदेश की बहनों को दिया था वचन। चुनाव में भाजपा द्वारा की गई घोषणाओं से महिलाओं में प्रतिमाह 3000 मिलने की उम्मीद बंधी थी। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से उम्मीद है कि वे महिलाओं की उम्मीदें नहीं तोड़ेंगे।
कांग्रेस नेता ने सागर के महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी का पत्र साझा किया है जिसमें लिखा गया है कि महिला एवं बाल विकास परियोजना सागर ग्रामीण दो में यदि किसी पर्यवेक्षक या किसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या सहायिका या स्वयं सहायता समूह के अध्यक्ष या सचिव या समूह के सदस्य के द्वारा लाड़ली बहना योजना की जो शासन द्वारा निर्धारित शर्तें थीं, उन शर्तों के विपरीत लाभ लिया गया है तो पंद्रह दिन के भीतर लाभ परित्याग कर दें अथवा शर्ताें के विपरीत लाभ लेने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।
ज्ञात होगी शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने महिलाओं को लाडली बहन योजना शुरू की थी इस योजना के जरिए 1000 से बढ़कर ₹3000 मासिक तक दिए जाने का वादा किया गया था। उसी के मुताबिक महिलाओं को वर्तमान में 1250 रुपए मिल रहे हैं। इस योजना में शुरुआती तौर पर कुछ शर्ते की गई थी जिन्हें बाद में खत्म कर दिया गया और अधिकांश महिलाएं इस योजना के लाभ की श्रेणी में आ गई।