खेलमध्यप्रदेश
डीपीएल मे पहले ही दिन दिखा दिव्यांग खिलाड़ियों का जोश और जुनून
ग्वालियर, रीवा, ग्वालियर और इंदौर की टीमें हिस्सा

मैहर/ सतना 8 जनवरी। मां शारदा की पावन धरा पर सोमवार को पहली बार आईपीएल की तर्ज पर डीपीएल यानी दिव्यांग प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का आगाज हुआ। पहले दिन हुए दो मैचों में ही दिव्यांग खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के बल पर दर्शकों का दिल जीत दिया और उनकी जीवटता, जोश व जुनून ने रोमांच को कई गुना बढ़ा दिया।
दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन, मध्यप्रदेश और मधुरिमा सेवा संस्कार संस्थान के संयुक्त आयोजन डीपीएल टूर्नामेंट का उद्घाटन पूजन और अतिथियों के स्वागत व खिलाड़ियों के परिचय के साथ हुआ। रामपुर बघेलान विधानसभा क्षेत्र से विधायक विक्रम सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर डीपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ किया। मधुरिमा सेवा संस्कार संस्थान की संस्थापक डा स्वप्ना वर्मा ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी।
उस्ताद अल्लाउद्दीन खां स्टेडियम में शुरु हुए टूर्नामेंट के पहले मैच में ग्वालियर की टीम छाई रही और उसके खिलाड़ियों ने मैच को एकतरफा बना दिया। यही कारण रहा कि 20-20 ओवर के इस मैच को .ग्वालियर ने रीवा के स्कोर 86 रन को महज 11 ओवर 1 गेंद में चार विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया। इस तरह ग्वालियर ने मैच 6 विकेट से जीता।
दूसरा मैच भोपाल और इंदौर के बीच खेला गया। इस मैच में भोपाल ने पहले बल्लेबाजी की, बड़ा स्कोर खड़ा किया मगर इंदौर उस स्कोर से दूर रहा। परिणामस्वरुप इंदौर के हिस्से में 27 रन से हार आई।
इस मौके पर समाज सेवी डाॅ स्वप्ना वर्मा ने दिव्यांग वर्ग की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि दिव्यांग वे लोग हैं जिनमें भले ही कुछ शारीरिक कमी हो मगर उनको ईश्वर ने अतिरिक्त शक्ति दी हुई होती है। हर दिव्यांग में यही भाव जगाने के मकसद से डीपीएल टूर्नामेंट आयोजित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर के इस क्रिकेट टूर्नामेंट में मध्यप्रदेश के चार प्रमुख शहरों- ग्वालियर, रीवा, ग्वालियर और इंदौर की टीमें हिस्सा ले रही हैं। 10 जनवरी तक चलने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय दिव्यांग प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट में भारत के अलावा नेपाल के भी खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें कई अंतराष्ट्रीय ख्याति के क्रिकेट खिलाड़ी हैं।
डीपीएल टूर्नामेंट के शुरु होने से पूरा स्टेडियम क्रिकेट के रंग में रंगा रहा और खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने दर्शकों को दांतों तले उंगली तक दबाने को मजबूर कर दिया, क्योंकि बल्लेबाजी हो, गेंदबाजी या फिर फील्डिंग में कई ऐसे नजारे देखने को मिले जिन्होंने अंतराष्ट्रीय मैच की याद ताजा कर दी।



