मध्यप्रदेश

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सेवा प्रदायगी की दक्षता को करें मजबूत: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल 

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उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सेवा प्रदायगी की दक्षता को और अधिक मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित न रहकर मरीजों को समयबद्ध, सुगम एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का माध्यम बने। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में डिजीटल तकनीक के उपयोग से सशक्तीकरण की प्रस्तावित कार्ययोजना की समीक्षा की और प्रावधानों पर गहन विमर्श किया। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में जांच, पंजीयन, प्रिस्क्रिप्शन, दवा वितरण, भर्ती एवं डिस्चार्ज जैसी सेवाओं को आपस में डिजिटल रूप से जोड़ा जाए, जिससे मरीजों को एकीकृत एवं सहज स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें।

आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस ने प्रदेश में प्रस्तावित डिजिटल हेल्थ ट्रांसफॉर्मेशन एवं स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ीकरण की चरणबद्ध कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि ओपीडी, आईपीडी, वाइटल्स, प्रिस्क्रिप्शन, फार्मेसी, लैबोरेटरी इंफॉर्मेशन सिस्टम (एलआईएस), रेडियोलॉजी इंफॉर्मेशन सिस्टम (आरआईएस) और डिस्चार्ज सेवाओं को चरणबद्ध रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। कार्ययोजना के अनुसार पोर्टल एवं सॉफ्टवेयर विकास, अस्पतालों की आवश्यकताओं का निर्धारण, मरीजों की डिजिटल यात्रा (पेशेंट जर्नी) का निर्धारण और चिकित्सकीय टेम्पलेट्स को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। ओपीडी, वाइटल्स, प्रिस्क्रिप्शन एवं फार्मेसी मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए व्यापक प्रशिक्षण एवं जिला स्तरीय ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए जाएंगे।

आईपीडी एडमिशन एवं डिस्चार्ज मॉड्यूल सहित अस्पतालों में डेमो वर्जन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ प्रणाली का अभ्यास कर सकें। अगले चरण में चयनित मेडिकल कॉलेजों एवं जिला अस्पतालों में प्रथम पायलट चरण प्रारंभ करने का प्रस्ताव है। इसके साथ लैबोरेटरी इंफॉर्मेशन सिस्टम (एलआईएस) के एकीकरण, प्रशिक्षण सत्रों तथा जिला स्तरीय स्वास्थ्य समीक्षा केंद्रों की स्थापना की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके पश्चात अन्य मेडिकल कॉलेजों एवं जिला अस्पतालों तक व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा तथा रेडियोलॉजी इंफॉर्मेशन सिस्टम (आरआईएस) का एकीकरण किया जाएगा। विभिन्न मॉड्यूल्स को चरणबद्ध रूप से लाइव करने तथा दिसंबर तक प्रदेशव्यापी रोलआउट की तैयारी की जाएगी।

डिजिटल हेल्थ सिस्टम के माध्यम से जांच, पंजीयन, दवा वितरण एवं उपचार संबंधी सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा, जिससे मरीजों को अस्पतालों में अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित एवं सुगम सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। साथ ही डेटा आधारित मॉनिटरिंग एवं जवाबदेही व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रदेश में हीमोडायलिसिस सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी विशेष तैयारी योजना प्रस्तुत की गई। योजना के अंतर्गत पुराने एवं जर्जर हो रहे उपकरणों को चरणबद्ध रूप से प्रतिस्थापित करने और आवश्यकता अनुसार नई मशीनों एवं सुविधाओं को सशक्त करने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिससे गंभीर किडनी रोगियों को बेहतर एवं निरंतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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