राजस्थान

राजस्थान में बढ़ेगी गर्मी की मार, बदलते मौसम से सूखा और बारिश का खतरा बढ़ेगा

जयपुर
 राजस्थान में मानसून की बारिश पिछले कुछ दशकों में बढ़ी है, लेकिन इसके साथ मौसम का मिजाज भी बदल रहा है। अब बारिश सामान्य तरीके से होने के बजाय कभी कम तो कभी बहुत ज्यादा होने की आशंका बढ़ रही है। प्रदेश में गर्मी का असर आने वाले वर्षों में और बढ़ने का अनुमान है। 1981-2010 में साल में औसतन 130 दिन अधिकतम तापमान 35 डिग्री से ऊपर रहता था। 2011-2024 में यह आंकड़ा 131 दिन रहा। इसके 2031-2050 में 176 दिन और 2051-2070 में 185 दिन तक पहुंचने का अनुमान है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

क्लाइमेट संबंधी शोध संस्था काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर के अध्ययन में राजस्थान के मौसम को लेकर यह तस्वीर सामने आई है। संस्था ने बुधवार को जयपुर में आयोजित सेमिनार में बदलते मौसम के आंकड़े प्रस्तुत किए।

रात में गर्मी के दिन भी बढ़ने का दावा
25 डिग्री से अधिक न्यूनतम तापमान वाले दिन 1981-2010 में 79 थे, जो 2011-2024 में बढ़कर 91 हो गए। 2031-2050 में ऐसे दिन 132 और 2051-2070 में 139 तक पहुंच सकते हैं। यानी आने वाले समय में राजस्थान में सिर्फ दिन ही नहीं, रातें भी ज्यादा गर्म होंगी।

मानसूनी बारिश बढ़ी, आगे घटने का अनुमान
राजस्थान में 1981-2010 के दौरान औसत मानसूनी बारिश 471 मिलीमीटर थी। 2011-2024 में यह बढ़कर 598 मिलीमीटर हो गई। यानी बारिश में करीब 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। लेकिन भविष्य में बारिश की मात्रा बढ़ती ही रहेगी, ऐसा नहीं है। 2051-2070 के दौरान औसत मानसूनी बारिश 569 मिलीमीटर रहने का अनुमान है। इसका मतलब यह है कि राजस्थान में बारिश की कुल मात्रा से ज्यादा चिंता उसके बदलते मिजाज की है।

शोध में और क्या आया सामने?
शोध के मुताबिक, पश्चिमी राजस्थान में आने वाले समय में लंबे समय तक सूखा पड़ने और धूलभरी आंधियां चलने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं पूर्वी राजस्थान में गर्मी के साथ उमस भी लोगों की परेशानी बढ़ाएगी। दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में मानसून के दौरान बारिश बढ़ने की संभावना जताई गई है। हालांकि, बारिश का यह बदलता मिजाज खेती और जल संसाधनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है, क्योंकि कभी ज्यादा तो कभी कम बारिश होने से किसानों और पानी के प्रबंधन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

 

Related Articles

Back to top button