मध्यप्रदेश

31 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण की धड़कन रोकने से हाईकोर्ट का इंकार, दुष्कर्म पीड़िता मामले में बड़ा फैसला

जबलपुर 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था 31 सप्ताह से अधिक होने के कारण गर्भपात की अनुमति देने से इंकार कर दिया। बता दें कि नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की अनुमति के लिए मंडला जिला न्यायालय द्वारा भेजे गए प्रकरण की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में हाईकोर्ट कर रहा था। पीड़िता की उम्र 15 साल 10 माह है और मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद एकलपीठ ने पाया कि 27 अप्रैल 2026 की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की गर्भावस्था 26 हफ़्ते और 5 दिन थी। मेडिकल जांच को हुए 32 दिनों से अधिक का समय हो गया है। वर्तमान में उसकी गर्भावस्था 31 सप्ताह से अधिक है। उसका हीमोग्लोबिन 7.5 है। मेडिकल बोर्ड की राय के अनुसार भ्रूण जीवित है और यह एक व्यवहार्य गर्भावस्था है। इस चरण में गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करना संभव नहीं है।

एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता भी नहीं चाहती थी कि यह न्यायालय ऐसा कोई निर्देश जारी करे। सुनवाई के दौरान उसने न्यायालय को इस बारे में सूचित किया था। दिल की धड़कन रोकने का निर्देश न होने की स्थिति में जीवित भ्रूण को जीवन भर शारीरिक और मानसिक विकलांगता का गंभीर खतरा बना रहेगा। मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टें अपने आप में सब कुछ स्पष्ट कर देती हैं। बच्चे का जन्म जीवित अवस्था में होता है, तो राज्य उस बच्चे की पूरी देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 

Related Articles

Back to top button