राजस्थान

जयपुर समेत 11 शहरों में घर 63% तक महंगे, टियर-2 सिटीज में रियल एस्टेट का बूम

जयपुर
 देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में घर तेजी से महंगे हो रहे है। सीआइआइ और नाइट फ्रैंक इंडिया की हाल ही जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से 2026 के बीच जयपुर समेत 11 शहरों में आवासीय कीमतें 63 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि शीर्ष आठ शहरों में यह बढ़ोतरी 42 प्रतिशत रही। जयपुर टियर-2 शहरों में दिल्ली-एनसीआर के सबसे करीब है। यहां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है और यह पर्यटन का बड़ा केंद्र है। आसपास से गुजर रहे बड़े हाईवे और एक्सप्रेसवे से शहर जुड़ चुका है या जल्द जुड़ने वाला है।

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इन फैक्टर्स ने जयपुर को आवासीय और व्यावसायिक, दोनों क्षेत्रों में रियल एस्टेट हब बना दिया है। भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, गोवा, इंदौर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, विशाखापत्तनम और कोयंबटूर में 2016 से 2026 के बीच आवासीय कीमतें औसतन 8% सालाना बढ़ीं, जबकि शीर्ष आठ शहरों में यह वृद्धि 4% रही।

2047 तक रियल एस्टेट बाजार 5.8 ट्रिलियन डॉलर तक
रिपोर्ट के अनुसार 2047 तक देश के रियल एस्टेट क्षेत्र का कारोबार 5.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी 25 से 30 प्रतिशत यानी 1.4 से 1.7 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान इसके लिए रोजगार देने वाला बुनियादी ढांचा, विकसित जमीन, तेज मंजूरी और भरोसेमंद बिजली पानी जरूरी होंगे। सरकारी पूंजीगत खर्च में बुनियादी ढांचे की हिस्सेदारी है।

वित्त वर्ष 2015 में 39 प्रतिशत थी, जो 2026 में 55 प्रतिशत हो गई। सरकार की तीन साल की सरकारी-निजी भागीदारी योजना में 17 लाख करोड़ रुपये की 852 परियोजनाएं हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि बढ़त अब महानगरों से आगे फैल रही है। निवेशकों और डेवलपर्स को हर बाजार की आर्थिक ताकत समझकर चुनिंदा तरीके से आगे बढ़ना होगा।

गोदाम और शॉपिंग सेंटर में भी विस्तार
2025 में प्रमुख टियर-2 शहरों में 1.12 करोड़ वर्ग फुट गोदाम किराये पर गए। जयपुर, लखनऊ, नागपुर, इंदौर, कोयंबटूर और भुवनेश्वर की हिस्सेदारी करीब आधी यानी 53 लाख वर्ग फुट रही। देश के 32 शहरों में 365 शॉपिंग सेंटर हैं। इनमें 3.6 करोड़ वर्ग फुट जगह 24 टियर-2 शहरों में है। इसमें जयपुर समेत 10 शहरों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है। एक्सपर्ट बताते हैं कि 2011-12 में जिस जमीन का भाव 500 रुपए गज था वह आज 50 हजार रुपए प्रति गज तक पहुंच गई है।

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