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भोपाल. मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. यह जिम्मेदारी तोमर के लिए सियासी तौर पर परीक्षा की घड़ी से कम नहीं है.
मध्य प्रदेश की राजनीति में तोमर का लंबे अरसे से दखल है और वे राज्य के दो बार प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं साथ में उन्होंने शिवराज मंत्रिमंडल में भी अहम जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है. वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भी तोमर को चुनाव प्रबंधक समिति का संयोजक बनाया गया था और अब एक बार फिर पार्टी ने वही जिम्मेदारी उनके कंधों पर रखी है. वर्ष 2018 के चुनाव में सत्ता भाजपा के हाथ से खिसक गई थी क्योंकि 230 विधानसभा सीटों में से भाजपा को 109 सीटें ही हासिल हुई थी जबकि कांग्रेस को 114 सीटें मिली थी और कांग्रेस सत्ता में आई.
बीते 5 साल की राज्य की सियासत पर गौर करें तो तोमर का राज्य की राजनीति में सीधे तौर पर कोई दखल नहीं है वे केंद्रीय मंत्री के तौर पर राज्य में सक्रिय नजर आए मगर संगठनात्मक गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहे. अब जहां राष्ट्रीय नेतृत्व में चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को बनाया है और सह प्रभारी अश्वनी वैष्णव को तो वही तोमर को प्रबंधन समिति का संयोजक बना दिया गया है.
भाजपा के लिए इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव आसान नहीं है यह पार्टी भी जानती है. यही कारण है कि लगातार केंद्रीय नेतृत्व अपने प्रतिनिधियों को राज्य की कमान सौंप रही है. तोमर उस इलाके से आते हैं जहां से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया है यानी कि ग्वालियर चंबल इलाके में दोनों राजनेताओं का अच्छा खासा दखल है. राज्य में अलग-अलग इलाकों में नेताओं का अपना प्रभाव है और उनके बीच समन्वय बनाना बहुत आसान भी नहीं है, इन स्थितियों में तोमर अपने राजनैतिक कौशल का प्रयोग किस तरह करते हैं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.
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