हमर छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में अब सीधे किचन तक पहुंचेगी गैस, मंत्रिपरिषद ने ‘शहरी गैस वितरण नीति-2026’ को दी मंजूरी

रायपुर
 स्वच्छ ऊर्जा और शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026 को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया यह निर्णय राज्य की ऊर्जा संरचना को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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इस नीति का मुख्य उद्देश्य पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस (PNG) को सीधे घरों तक पहुंचाना है। इसके लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग, आपूर्ति में देरी या उपलब्धता को लेकर होने वाली अनिश्चितताओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी। 

रायपुर सहित राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से गैस पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे 24 घंटे निर्बाध और सुरक्षित गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी 
राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में पाइपलाइन गैस वितरण प्रणाली पहले से संचालित है और इसे व्यापक रूप से प्रभावी माना गया है। इन महानगरों में रसोई गैस के पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी आई है और आपूर्ति अधिक नियमित व सुगम बनी है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय उसी दिशा में एक तार्किक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में लंदन, टोक्यो और सिंगापुर जैसे शहरों में पाइपलाइन आधारित गैस वितरण लंबे समय से स्थापित व्यवस्था है। इन शहरों के अनुभव बताते हैं कि यह प्रणाली न केवल उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक है, बल्कि ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से भी बेहतर विकल्प प्रदान करती है।

निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी
नीति के लागू होने से राज्य में गैस अवसंरचना के विकास के साथ निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे निर्माण, वितरण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही स्वच्छ ईंधन के उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है, जो तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल छत्तीसगढ़ को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख राज्य के रूप में स्थापित कर सकती है। उपभोक्ता सुविधा, औद्योगिक जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन—तीनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह नीति राज्य के शहरी विकास को नई गति देने की क्षमता रखती है।

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