भारत
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना से आर्थिक कमजोर युवाओं का बेहतर भविष्य बनेगा -मनोज तिवारी
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट (आईआईएम)मुंबई ने ऐतिहासिक पहल बताया
मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बिना किसी जमानत और गारंटी के ऋण प्रदान करने के मकसद से शुरू की गई पीएम विद्यालक्ष्मी योजना को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट (आईआईएम)मुंबई ने ऐतिहासिक पहल बताया है और कहा है कि इससे आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों के बेहतर भविष्य का निर्माण होगा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2024- 2025 से 2030 -2031 की अवधि के लिए अनुमानित 3600 करोड रुपए के आवंटन के साथ पीएम विद्यालक्ष्मी योजना को मंजूरी दी है ।इस योजना में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छुक छात्रों को रियायती ब्याज दरों पर साढ़े सात लाख रुपए तक के ऋण की पेशकश की गई है। इससे सालाना 2.2 मिलियन छात्रों को प्रोत्साहन मिलेगा।
केंद्र सरकार की स्पेशल को लेकर आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रोफेसर मनोज तिवारी ने कहा है, यह पहल उच्च शिक्षा को सभी छात्रों विशेष रूप से आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल शिक्षित वर्क फोर्स बनाने के, दृष्टिकोण की सराहना करते हैं जो विकास को गति देगा और इस देश के युवाओं के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण करेगा।
केंद्र सरकार के फैसले के मुताबिक इस योजना में 8 लाख तक के वार्षिक आय वाली परिवार के छात्रों के लिए जिसमें 10 लाख रुपए तक के ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज सहायता प्रदान की जाती है। इससे हर साल 1 लाख छात्रों को लाभ होगा, जिससे वह उच्च ब्याज दरों कोलैटरल या गारंटी के बिना उच्च शिक्षा के लिए धन प्राप्त कर सकेंगे। यह योजना भारतवर्ष के 860 संस्थाओं को कवर करती है जिसमें एनआईआरएफ रैंकिंग में सूचीबद्ध सार्वजनिक और निजी दोनों विश्वविद्यालय शामिल है। पीएम विद्यालक्ष्मी योजना का उद्देश्य वित्तीय बाधाओ के कारण ड्रॉप आउट को कम करना है जो वर्तमान में 38 प्रतिशत है। छात्रों को रोजगार मिलने के बाद ऋण चुकाया जाएगा, जिससे एक रिवाल्विंग फंड बनेगा जो भविष्य के छात्रों को सपोर्ट करेगा और देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान देगा।



