
भोपाल,मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में कहा,किसी भी सरकार के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता बनाए रखना होती है, शिवराज सरकार विश्वसनीयता खो चुकी है, कोई भी सरकार जब चयन में धांधली पर उतर आए ये उसका सबसे निकृष्टतम स्तर होता है, कोई भी विभाग ऐसा नहीं था जहा बेइमानी वा भ्रष्टाचार करने में शिवराज सरकार ने कोई कसर छोड़ी हो। प्रदेश की जनता बोल रही है कि एक तरफ तो मामा (शिवराज) का ड्रामा चल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ 50 प्रतिशत कमीशन दो और किसी भी विभाग में नौकरी पाओं का कारनामा चल रहा है। मुझे अभी कुछ विधार्थियांे का प्रतिनिधिमंडल मिलने आया था, जिन्होंने बात ही बात में कहा कि शिवराज घोटालों के ब्रांड एंबेसडर है क्योंकि शिवराज ने ऐसा कोई सगा नहीं जिसको उन्होंने ठगा नहीं। भांजी और भांजों को भी इन्होने नही छोड़ा, इनको तो छोड़ देते, उन पर तो रहम करते।
पटवारी ने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि, शिवराज जिस विभाग के मुखिया होते हैं, उसी विभाग में घोटाले क्यों होते हैं।
मैं धन्यवाद देना चाहूंगा शिवराज सिहं को कि उन्होंने दबी जुबान मे स्वीकार किया कि पटवारी परीक्षा में घोटाला हुआ है और उन्होंने कर्मचारी चयन मंडल द्वारा समूह-2 और उपसमूह-4 एवं पटवारी भर्ती परीक्षा के परीक्षा परिणाम में एक सेंटर के परिणाम पर संदेह व्यक्त किया करते हुये परीक्षा के आधार पर की जाने वाली नियुक्तियों पर रोक लगा दी।
पटवारी ने कहा कि मात्र एक सेंटर की जांच कराने की बात अखबारों में जाहिर हुई है, यह उचित नहीं है, यह जांच के नाम पर धोखा है। पूरी परीक्षा की जांच होना चाहिए।
पटवारी ने कहा कि व्यापमं में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिस प्रकार से सफल विद्यार्थियों की जांच की गई, उसी पैटर्न पर पटवारी परीक्षा के सफल अभ्यार्थियों की जांच होना चाहिए। जितने अभ्यर्थी सफल हुए हैं, उनके सही अंक और गलत अंक के क्रमांक निकाल कर देखना चाहिए कि कहीं अधिकांश विद्यार्थियों के सही तथा गलत क्रमांक 90 प्रतिशत अगर समान हैं तो उसे रोल नंबर सेटिंग मानकर उनकी परीक्षा को व्यवसायिक परीक्षा मंडल के परीक्षा अधिनियम 3 (4) के तहत निरस्त किया जाना चाहिए। तभी इस घोटाले को उजागर किया जाएगा। एक केन्द्र की एक पाली की जांच से घोटाला उजागर नहीं होगा, वह तो और दबाने का काम हो जायगा और शिवराज जी, इसे दबाने का ही काम कर रहे हैं, क्योंकि यह विभाग उनका है, जिम्मेदारी उनकी है, उन्हें तो नैतिकता के आधार पर पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए लेकिन त्याग पत्र दें तो कैसे, कोई दूसरा भाजपा को चंदा देने वाला राष्ट्रीय नेताओं को मिल भी नहीं रहा है।
पटवारी ने कहा कि ऑनलाइन परीक्षा दिलाने वाली इस कंपनी ने मध्यप्रदेश में वर्तमान पटवारी परीक्षा सहित सत्रह परीक्षा आयोजित की है, जिसमें से अधिकांश परीक्षा में निजी स्तर पर घोटाले कर प्रकरण दर्ज हुए हैं। पटवारी परीक्षा में तो भोपाल में 12 से 20 लाख में पेपर बेचने वाले को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसके बाद भी शिवराज जी ने कोई कदम नहीं उठाया। उसी प्रकार जैसे 2009 में व्यापम घोटाला उजागर हो गया था, शिवराज जी उस समय भी विभाग के मुखिया थे, उन्होंने कमेटी बनाई और कमेटी बनाने के बाद घोटाला बढ़ कर 10 गुना हो गया। यानि साफ है कि घोटाले को शिवराज सरकार का सरंक्षण है, तभी तो व्यापम घोटाले को जांच को बंद कर दिया गया है।
पटवारी ने कहा कि 2007 से 2011 की पीएमटी परीक्षा में हुए जमकर घोटाले को लेकर व्यापम ने एसटीएफ को 1223 विद्यार्थियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के लिए 3 बार एसटीएफ को पत्र लिखे, लेकिन एसटीएफ ने शिवराज सरकार के इशारे पर प्रकरण दर्ज करने से इंकार कर दिया, कि इसमें पुष्टिकरण साक्षय नहीं है, जबकि यह जांच सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए फार्मूले से की गई थी, और उसी की गई जांच के आधार पर 2012 और 2013 मे 1856 पर प्रकरण दर्ज किए गए। व्यापम के तात्कालिक एग्जाम कंट्रोलर सुधीर भदोरिया को बचाया जा सके इसलिए 2007 से लेकर 2011 पीएमटी परीक्षा में प्रकरण दर्ज नहीं किया जा रहा है। क्या कारण है कि व्यापमं ने परीक्षा आयोजित करने के लिए 2017-18 से चार कंपनियां बदली, फिर भी घोटालांे पर अंकुश नहीं लगा सकी है शिवराज सरकार?