मध्यप्रदेश

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन में बनेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर का सफारी और जू, अनंत अंबानी के वनतारा प्रोजेक्ट के साथ टीम ने किया सर्वे

उज्जैन 

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सिंहस्थ 2028 से पहले पर्यटक उज्जैन में शेर सहित विभिन्न वन्यजीव प्राणी देख सकेंगे। अनंत अंबानी के वनतारा प्रोजेक्ट के साथ मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन के नवलखी बीड़ के रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में 201 हेक्टेयर वन क्षेत्र में जू रेस्क्यू सेंटर और सफारी शुरू कर दिया। इसकी शुरुआत हो चुकी है। 21 अक्टूबर को चार सदस्यीय टीम क्षेत्र का अवलोकन कर चुकी है। जल्द ही इसका काम शुरू होगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले धार्मिक पर्यटक अब रोमांच का भी आनंद ले सकेंगे।

मध्यप्रदेश सरकार 350 करोड़ रुपए खर्च कर उज्जैन में वन्यजीव प्राणियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का सफारी, रेस्क्यू सेंटर और जू खोलने जा रही है। ‘वनतारा’ के साथ मिलकर इसकी शुरुआत की जाएगी। वन्य प्राणियों के लिए नए कॉन्सेप्ट के तहत इसकी शुरुआत होगी, जिसमें 4 किलोमीटर क्षेत्र में टाइगर सफारी विकसित की जाएगी। यहां लैंडस्केप आधारित क्षेत्र बनेगा, यहां आने वाले पर्यटक नदी और पत्थरों के बीच शेरों को देख सकेंगे।

यहां बनने वाले जू में अलग-अलग वन्य प्राणियों को रखा जाएगा। फिलहाल प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए 350 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। जल्द ही डीपीआर तैयार की जाएगी। इसके बाद यदि अतिरिक्त राशि की आवश्यकता हुई तो उसका वहन मध्यप्रदेश सरकार करेगी। इसे ओडिशा के नंदनकानन जू की तरह बनाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस जू, रेस्क्यू सेंटर और सफारी में जानवरों को उनके प्राकृतिक वातावरण में रखा जाएगा।

तीन फेज में बनेगा सफारी, रेस्क्यू सेंटर और जू

डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि वनतारा के साथ एमओयू साइन होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर की चार सदस्यीय टीम उज्जैन के नवलखी बीड़ पहुंची थी। टीम में डॉ. इयान वैलेंटाइन (अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर विशेषज्ञ), एडम गेट्रिक्स, कैरोलिना स्टामेंटे, अलीशा मेनेजेस (लैंडस्केप आर्किटेक्ट) और क्रिस्टोफर लियांग शामिल थे। ये सभी 21 अक्टूबर को क्षेत्र का अवलोकन करने पहुंचे थे।

टीम ने गहन अध्ययन के दौरान क्षेत्र की टोपोग्राफी देखी, क्षेत्र का एनालिसिस किया और सभी डेटा एकत्र कर अपने साथ ले गई है। इसके बाद डीपीआर तैयार की जाएगी। टीम ने वन विभाग के अधिकारियों को एक प्रेजेंटेशन भी दिया, जिसमें सिंगापुर सहित अन्य देशों में चल रहे जू के बारे में जानकारी दी गई।

2030 तक पूरा होगा उज्जैन का मेगा जू प्रोजेक्ट

उज्जैन में वन्यजीवों के लिए शुरू होने वाले इस बड़े प्रोजेक्ट को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जू में विदेशी जानवरों के साथ-साथ मांसाहारी (कार्निवोरस), शाकाहारी (हर्बिवोरस), पक्षी और जलचर जीव (एक्वेटिक एनिमल) रखे जाएंगे। इनमें शेर, बाघ, भेड़िए, हाथी, हिरन, खरगोश सहित सभी प्रकार के पक्षी और अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना और यीस्ट जैसे सूक्ष्म जीव भी उज्जैन के जू में देखे जा सकेंगे।खास बात यह है कि नाइट सफारी को लेकर भी चर्चा हुई है। विशेषज्ञों की टीम यह तय करेगी कि उज्जैन में नाइट सफारी शुरू की जा सकेगी या नहीं।

जू के वन्य प्राणियों और सफारी का आनंद मिनी रेल में भी ले सकेंगे पर्यटक

मालवा-निमाड़ का सबसे बड़ा रेस्क्यू सेंटर बनने जा रहा उज्जैन का जू और सफारी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। यहां मिनी रेल चलाने की भी योजना है। डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि देशभर से आने वाले पर्यटक जू के वन्य प्राणियों और सफारी का आनंद मिनी रेल से भी ले सकेंगे। इसकी योजना तैयार की जा चुकी है। रेल में बैठकर पर्यटक पूरा पार्क घूम सकेंगे और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर पाएंगे।

रेस्क्यू सेंटर के लिए बड़ा अस्पताल बनेगा

तीन अलग-अलग सेटअप तैयार किए जाएंगे, जिनमें ज़ू अलग, सफारी का स्थान अलग और रेस्क्यू सेंटर के लिए बड़ा अस्पताल बनाया जाएगा। इसमें संभाग के छोटे-बड़े जंगली जानवरों का रेस्क्यू किया जा सकेगा, साथ ही यहीं पर वन्यजीवों का इलाज भी किया जाएगा।

रेस्क्यू सेंटर की एक बड़ी बिल्डिंग बनेगी, जिसमें वेटरनरी डॉक्टर सहित कई पदों पर भर्ती की जाएगी।

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