भारतमध्यप्रदेश
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को रोकने साधु संतों की कामतानाथ के दरबार में अर्जी
साधु संतों ने चित्रकूट में कामतानाथ की परिक्रमा की

सतना। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से समाज का हर वर्ग चिंतित है। साधु संतों ने इन अत्याचारों पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित चित्रकूट में कामतानाथ के दरबार में अर्जी लगाई है।
बांग्लादेश में सत्ता बदलाव के बाद अल्पसंख्यक हिंदुओं पर कट्टरपंथियों के हमले हो रहे हैं। हत्याओं का दौर जारी है हिंदू धार्मिक स्थलों को क्षतिग्रस्त किया जा रहा है और हिंदू धर्म से जुड़े लोगों को गिरफ्तार तक किया जा रहा है। इन स्थितियों से समाज का हर वर्ग चिंतित है और अपने-अपने तरह से इन हरकतों पर रोक लगाने के जतन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में चित्रकूट के साधु संत आगे आए हैं और उन्होंने इसके लिए धार्मिक अनुष्ठानों का सहारा लिया है।
सामाजिक संगठन मधुरिमा सेवा संस्कार फाऊंडेशन की पहल पर
और कामतानाथ के दरबार में पूजा अर्चना कर एक अर्जी लगाई। साधु संतों की परिक्रमा का यह सिलसिला शरणागत आश्रम से शुरू हुआ जिसमें बड़ी संख्या में साधु संत शामिल थे। उनके हाथ में भगवा ध्वज थे और साथ में सरयू नदी अयोध्या से लाया गया जल भी था।सभी भजन कीर्तन करते हुए आगे बढ़े।
और कामतानाथ के दरबार में पूजा अर्चना कर एक अर्जी लगाई। साधु संतों की परिक्रमा का यह सिलसिला शरणागत आश्रम से शुरू हुआ जिसमें बड़ी संख्या में साधु संत शामिल थे। उनके हाथ में भगवा ध्वज थे और साथ में सरयू नदी अयोध्या से लाया गया जल भी था।सभी भजन कीर्तन करते हुए आगे बढ़े।मधुरिमा सेवा संस्कार संस्थान की संस्थापिका डॉ स्वप्ना वर्मा का कहना है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार को दुनिया देख रही है। भारत की सरकार अपने स्तर पर इस अन्याय को रोकने के प्रयास कर रही है वहीं समाज भी अपने तरह से प्रयास में जुटा है। हमारे यहां मानता है जो काम इंसान नहीं कर सकता वह भगवान करते हैं बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार रुके इसके लिए पहले अयोध्या में राम जी के दरबार में और अब चित्रकूट में कामतानाथ के दरबार में अर्जी लगाई गई है। हमें भरोसा है कि बांग्लादेश में जारी हिंदू विरोधी गतिविधियों पर रोक लगेगी।
ज्ञात हो कि मंगलवार को साधु संतों का एक दल चित्रकूट की मंदाकिनी नदी का पवित्र जल लेकर अयोध्या गया था और इस दल ने मंदाकिनी के जल से सरयू नदी का अभिषेक किया था। साथ ही रामलला के मंदिर में पहुंचकर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर रोक लगे इसकी आराधना की थी।
यह दल सरयू नदी का जल लेकर चित्रकूट लौटा है और यहां कामतानाथ की परिक्रमा के बाद सरयू के जल से मंदाकिनी का अभिषेक किया गया है। साधु संतों का कहना है कि भगवान श्री राम की तपो भूमि चित्रकूट रही है और अयोध्या उनकी जन्म भूमि। इन दोनों स्थानों से प्रवाहित होने वाली नदियों मंदाकिनी और सरयू नदी का सनातन धर्म में खास महत्व है। लिहाजा उन्होंने मंदाकिनी के जल से सरयू नदी और सरयू के जल से मंदाकिनी का अभिषेक किया है। इसके साथ ही अयोध्या में रामलला और चित्रकूट में कामतानाथ से आराधना करके बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने की कामना की है।



