मध्यप्रदेश

Sickle Cell Disease: देश के 59% मरीज ओडिशा और MP में मिले, 7.27 करोड़ लोगों की हुई जांच

भोपाल

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन (NSCAEM) के तहत मध्य प्रदेश ने देशभर में जांच के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 1,33,69,993 (1.33 करोड़ से अधिक) लोगों की सिकल सेल जांच की जा चुकी है।

देशभर में सिकल सेल के जितने मरीज चिह्नित किए गए हैं, उनका 59.28% (लगभग 60 फीसदी) हिस्सा अकेले ओडिशा और मध्य प्रदेश में है।

जांच में एमपी में 40,741 लोग सिकल सेल बीमारी से पीड़ित पाए गए हैं, जबकि 2,45,024 व्यक्ति 'वाहक' (कैरियर) के रूप में चिह्नित हुए हैं। मध्य प्रदेश सरकार जनजातीय बहुल इलाकों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला अस्पतालों के माध्यम से इन मरीजों की डिजिटल ट्रैकिंग और मुफ्त इलाज (हाइड्रोक्सीयूरिया और फॉलिक एसिड वितरण) करा रही है।

देशभर में 7.27 करोड़ लोगों की जांचें हुईं
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 17 प्रमुख जनजातीय बहुल राज्यों में अब तक 7.27 करोड़ (7,27,10,014) से ज्यादा लोगों की सिकल सेल जांच की जा चुकी है। इस जांच अभियान में 20,47,145 लोग सिकल सेल के 'वाहक' (कैरियर) पाए गए हैं, जबकि 2,49,167 लोग इस बीमारी से 'पीड़ित' पाए गए हैं। इस मिशन की निगरानी राष्ट्रीय सिकल सेल पोर्टल से की जा रही है।

सबसे ज्यादा मरीज ओडिशा में, एमपी दूसरे नंबर पर
सिकल सेल से ग्रसित मरीजों की सबसे अधिक संख्या ओडिशा में है, जहां 1,06,969 मरीज चिह्नित हुए हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश में 40,741 मरीज, गुजरात में 30,548 मरीज और महाराष्ट्र में 30,017 मरीज पाए गए हैं। वहीं, जांच के मामले में छत्तीसगढ़ सबसे आगे रहा, जहां रिकॉर्ड 1.78 करोड़ से ज्यादा लोगों का टेस्ट किया गया, जिसमें 28,384 लोग ग्रसित पाए गए हैं।

छोटे अस्पतालों में भी फ्री जांच की सुविधा
सरकार आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और जिला अस्पतालों के स्तर तक 0-40 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों की मुफ्त जांच कर रही है। मरीजों को राहत देने के लिए आवश्यक दवा 'हाइड्रोक्सीयूरिया' को राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल कर निचले स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया गया है।

जानिए वाहक क्या होता है?
वाहक वह व्यक्ति होता है जिसे अपने माता-पिता में से किसी एक से सिकल सेल का दोषपूर्ण जीन (Gene) विरासत में मिलता है, जबकि दूसरे माता-पिता से सामान्य जीन मिलता है। ऐसे व्यक्तियों में बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते और वे एक सामान्य, स्वस्थ जीवन जीते हैं। उन्हें किसी विशेष इलाज की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि वे खुद बीमार नहीं होते, लेकिन वे इस दोषपूर्ण जीन को अपनी आने वाली पीढ़ी (बच्चों) में ट्रांसफर कर सकते हैं। इसीलिए इन्हें 'वाहक' कहा जाता है।

सिकल का मरीज भी समझिए
मरीज वह व्यक्ति होता है जिसे अपने माता-पिता दोनों से सिकल सेल का दोषपूर्ण जीन मिलता है। इस स्थिति में व्यक्ति के शरीर में सामान्य लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) नहीं बनतीं, बल्कि वे हंसिए (सिकल) के आकार की चिपचिपी और कड़क हो जाती हैं। इससे शरीर में खून और ऑक्सीजन का बहाव ठीक से नहीं हो पाता, जिससे गंभीर दर्द , एनीमिया (खून की कमी) और अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

इन्हें नियमित चिकित्सा देखभाल, दवाओं (जैसे हाइड्रोक्सीयूरिया और फॉलिक एसिड) और निरंतर फॉलो-अप की आवश्यकता होती है।

किट के जरिए कुछ मिनटों में बीमारी की पहचान
आंगनबाड़ी, आशा केंद्र, उपकेंद्र, सीएसपी और पीएचसी समेत अस्पताल में सॉल्युबिलिटी (घुलनशीलता) टेस्ट की सुविधा है। इसमें एक किट की मदद से महज कुछ मिनटों में ही बीमारी की पहचान हो जाती है। बीमारी चिह्नित होने के बाद पैटर्न के लिए हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच कराई जाती है। साल 1984 में पहली बार आईसीएमआर ने एमपी के नर्मदा किनारे के जिलों को सिकलसेल एनीमिया प्रभावित रेड जोन बताया था।

Related Articles

Back to top button